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SC: हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी, भूमि विवाद मामले में एमपी सरकार ने दायर की थी अपील

Sat, 25 Oct 2025 07:06 AM IST
लव गौर अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: लव गौर Updated Sat, 25 Oct 2025 07:06 AM IST
सार

भूमि विवाद के एक मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पौने पांच साल की देरी से दायर अपील को स्वीकार करने के हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार समेत अन्य को नोटिस जारी किया।
 

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Supreme Court expressed displeasure over High Court accepting appeal filed by MP govt in land dispute
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

भूमि विवाद के एक मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पौने पांच साल की देरी से दायर अपील को स्वीकार करने के हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार समेत अन्य को नोटिस जारी किया।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अपील दायर करने में चार वर्ष नौ महीने की देरी को माफ करना हाईकोर्ट की विवेकहीनता को दर्शाता है। याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत पाराशर ने पीठ के समक्ष दलील दी कि हाईकोर्ट ने कानून के स्थापित सिद्धांतों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने पूर्व फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि राज्य को देरी माफ करने में कोई विशेष छूट नहीं दी जा सकती।
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पाराशर ने कहा कि सरकार ने अपील दाखिल करने में घोर लापरवाही दिखाई है और सिर्फ सरकारी प्रक्रिया में देरी का हवाला देना पर्याप्त कारण नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शंकरगिर की विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने राज्य सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने को कहा। इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। 
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तहसीलदार का आदेश किया था रद्द
शंकरगिर ने 2002 में रतलाम जिले में 3.870 हेक्टेयर कृषियोग्य भूमि एक नीलामी के माध्यम से खरीदी थी। 2010 में तहसीलदार ने आदेश दिया कि यह भूमि मठ नव दुर्गा मंदिर की संपत्ति है। शंकरगिर ने इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी। रतलाम की जिला अदालत ने 25 नवंबर 2019 को अपने निर्णय में तहसीलदार का आदेश रद्द करते हुए कहा कि शंकरगिर इस भूमि के वैध मालिक और कब्जाधारी हैं तथा सरकार या मंदिर का इससे कोई लेना-देना नहीं है। राज्य सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ लगभग चार वर्ष नौ माह की देरी से 2024 में हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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