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सुप्रीम कोर्ट: कोविड-19 से जुड़ी दो याचिकाओं का निपटारा, कहा- ये अब निष्प्रभावी हो गईं

Tue, 28 Sep 2021 11:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 28 Sep 2021 11:12 PM IST
सार

ये याचिकाएं टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर और गैर कोरोना मरीजों के इलाज का निर्देश देने की मांग को लेकर दायर की गई थीं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि जरूरत पड़ने पर वह फिर कोर्ट आ सकते हैं।
 

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Supreme Court: Disposal of two petitions related to Covid-19, said - they have become ineffective now
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड-19 से जुड़ी दो याचिकाओं का यह कहते हुए निपटारा कर दिया कि ये याचिकाएं अब निष्प्रभावी हो गई हैं। शीर्ष अदालत ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कोविड टीकाकरण के लिए पंजीकरण की मांग वाली एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

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जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि मौजूदा नीति के तहत अब वॉक-इन पंजीकरण की अनुमति है, इसलिए अब इस याचिका पर सुनवाई करने का मतलब नहीं है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, अब कोविन वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। हमारे जून के आदेश के बाद हमें बताया गया है कि वॉक-इन पंजीकरण की अनुमति है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप हमारे पास वापस आ सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी है। मोबाइल फोन के जरिए इस हेल्पलाइन पर कॉल कर पंजीकरण किया जा सकता है।
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लॉकडाउन के दौरान दायर की गई थी याचिका
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें कोविड मरीजों के साथ-साथ गैर कोविड मरीजों को उचित चिकित्सा मुहैया कराने की मांग की गई थी। याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गैर-कोविड-19 रोगियों को लगातार, पर्याप्त और उचित चिकित्सा उपचार व सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड-19 लॉकडाउन अवधि के दौरान हृदय रोगी, गर्भवती महिलाएं, किडनी, लीवर और फेफड़े आदि की बीमारी से पीड़ित लोग बड़े व छोटे सर्जरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता से कहा, यह याचिका लॉकडाउन के दौरान दायर की गई थी। अब इस याचिका में कुछ भी नहीं बचा है। लॉकडाउन खत्म हो चुका है। जरूरत पड़ने पर आप फिर से हमारे पास आ सकते है। हालांकि उम्मीद है कि यह नहीं होगा।

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