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50 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर TDS: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका; जानें क्या है पूरा मामला?

Wed, 11 Feb 2026 04:59 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Wed, 11 Feb 2026 04:59 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति खरीदने पर टीडीएस की जानकारी देने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जानकारी के अभाव में ईमानदार खरीदारों को जुर्माना भरना पड़ता है।

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supreme court dismisses plea on tds awareness for property purchase above 50 lakh
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि सरकार को खरीदारों को TDS नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए एक ठोस तंत्र बनाना चाहिए। इस याचिका में कहा गया था कि 50 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स के नियम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं है। इस वजह से आम लोगों को परेशानी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया था कि जानकारी के अभाव में कई ईमानदार खरीदार अनजाने में गलती कर बैठते हैं। बाद में उन्हें बिना किसी गलत इरादे के भी जुर्माना और ब्याज देना पड़ता है। बेंच ने याचिका को सुनने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने क्या दलीलें दीं?
याचिकाकर्ता ने खुद कोर्ट में अपनी बात रखी। उन्होंने बेंच को बताया कि यह मामला 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति के सौदों में आयकर कानून के एक नियम को लागू करने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में टीडीएस की पूरी जिम्मेदारी केवल खरीदार पर डाल दी गई है।
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याचिका में कहा गया कि यह मान लिया जाता है कि हर प्रॉपर्टी खरीदार को आयकर कानून की पूरी जानकारी है, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो। याचिकाकर्ता के अनुसार, जब प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के समय इसकी जांच का कोई सरकारी सिस्टम ही नहीं है, तो ऐसी उम्मीद करना गलत है।

याचिकाकर्ता ने अपना निजी मामला बताते हुए कहा कि वह पहली बार घर खरीद रहे थे और उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, "यह दिखाता है कि यह एक सिस्टम से जुड़ी समस्या है। कई खरीदार बिना टीडीएस जांच के ही रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेते हैं।"


उन्होंने साफ किया कि वह आयकर कानून के प्रावधानों या टैक्स देनदारी को चुनौती नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं केवल एक संस्थागत सुरक्षा उपाय के लिए सीमित निर्देश देने की मांग कर रहा हूं, ताकि सिस्टम की कमी के कारण नागरिक अनजाने में डिफॉल्टर न बनें।" उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे कदमों से नागरिकों की रक्षा होगी, नियमों का पालन बेहतर होगा और सरकार के राजस्व की भी सुरक्षा होगी।

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