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चुनाव में रिश्वत, झूठे बयान जैसे अपराधों में कड़ी सजा वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

Mon, 27 Aug 2018 02:33 PM IST
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Aug 2018 02:33 PM IST
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Supreme Court dismisses petitions challenging bribery, false statements like crimes in elections

उच्चतम न्यायालय ने चुनाव में उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा रिश्वत देने, झूठा बयान देने, अनावश्यक रूप से प्रभावित करने जैसे चुनाव संबंधी अपराधों के लिये कम से कम दो साल की सजा का प्रावधान करने की मांग वाली जनहित याचिका आज खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने चुनाव संबंधी अपराध को संज्ञेय बनाने के लिये वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका सुनवाई के बाद खारिज कर दी।

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उपाध्याय ने याचिका में आरोप लगाया था कि वर्ष 2000 के बाद से आम चुनाव और राज्य विधानसभा के चुनावों के अलावा उपचुनावों के दौरान भी किसी राजनीतिक दल और उम्मीदवार के लिए समर्थन जुटाने के लिहाज से रिश्वत दी जाती है। याचिका के अनुसार इस समय रिश्वखोरी गैर संज्ञेय अपराध है जिसके लिये मामूली सजा का प्रावधान है। ऐसा देखा गया है कि स्थानीय निकाय से लेकर लोकसभा के चुनाव तक हर स्तर पर रिश्वत देने की घटनाओं में वृद्धि हुयी है और ऐसी स्थिति में कानून में बदलाव जरूरी हो गया है।
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उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि निर्वाचन आयोग ने भी 2012 में गृह मंत्रालय से सिफारिश की थी कि मौजूदा कानून में संशोधन करके रिश्वत देने को संज्ञेय अपराध बनाकर इसके लिये दो साल तक की सजा का प्रावधान किया जाये ताकि ऐसा अपराध करने के आरोपी को पुलिस बगैर किसी वारंट के ही गिरफ्तार कर सके।
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याचिका में कहा गया था कि गृह मंत्रालय ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया था कि उसने इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 171बी और 171ई में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है। परंतु इसके बाद इस मामले में आगे कुछ नहीं हुआ है।

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