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मुलायम सिंह को राहत, कार सेवकों पर गोली चलवाने पर एफआईआर की याचिका खारिज
Wed, 02 Jan 2019 12:35 PM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अजय सिंह
Updated Wed, 02 Jan 2019 12:35 PM IST
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मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में कहा गया है कि 1990 में यादव ने राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वाले कार सेवकों पर गोली चलाने के आदेश दिए थे।
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Supreme Court dismisses a petition seeking registration of FIR against former UP Chief Minister Mulayam Singh Yadav, for giving an order to open fire on Kar Sewaks in 1990 during the agitation for Ram Temple.
— ANI (@ANI) January 2, 2019
बता दें लाखाें कारसेवकाें की भीड़ अयाेध्या में 2 नवंबर 1990 को शुक्रवार के दिन जब बेकाबू हुई थी। तब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भीड़ काे तितर बितर करने के लिये गाेली चलाने का अादेश दिया था। इतिहास के पन्नाें में इसे अयाेध्या गाेलीकांड के नाम से जाना जाता है। इसमें कई कारसेवकाें की जान चली गई थी।
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने फायरिंग का आदेश देने के 23 साल बाद कहा कि उन्हें अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश देने का दुख है। 2 नवंबर 1990 को बेकाबू हुए कारसेवकों पर यूपी पुलिस ने फायरिंग की थी जिसमें कई कारसेवक मारे गए थे।
उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। मुलायम ने कहा था कि उस समय मेरे सामने मंदिर-मस्जिद और देश की एकता का सवाल था। भाजपा वालों ने अयोध्या में 11 लाख की भीड़ कारसेवा के नाम पर लाकर खड़ी कर दी थी।
देश की एकता के लिए उन्हें अयोध्या में गोली चलवानी पड़ी थी। अगर गोली नहीं चलती तो मुसलमानों का देश से विश्वास उठ जाता। उन्होंने कहा गोली चलने का अफसोस है मगर देश की एकता के लिए 16 की जगह 30 जानें भी जातीं तो भी पीछे नहीं हटते।
मुलायम ने एक कार्यक्रम में कहा था कि गोली चलवाने से उनकी बहुत आलोचना हुई। संसद में उनका विरोध भी हुआ। मगर यह कदम देश हित में था। ऐसा न होता तो हिन्दुस्तान का मुसलमान कहता कि अगर हमारा धर्मस्थल नहीं बच सकता तो हिन्दुस्तान में रहने का क्या औचित्य। समाजवाद का मतलब सबको साथ लेकर चलना है। भेदभाव नहीं होना चाहिए।
मुलायम सिहं यादव ने 24 जनवरी, 2016 काे एक बयान में कहा था कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। इसका अफसोस है लेकिन धर्मस्थल को बचाना जरूरी था। इसलिए गोली चलवाई थी।
16 जुलाई, 2013 को मुलायम सिहं यादव ने अपने एक बयान में कहा था कि उस समय मेरे सामने मंदिर-मस्जिद और देश की एकता का सवाल था। देश की एकता के लिए मुझे गोली चलवानी पड़ी थी। अफसोस है लेकिन कोई और विकल्प नहीं था।