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Supreme Court: 'गंभीर सामाजिक समस्या, PCPNDT कानून जरूरी', कन्या भ्रूण हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट

Mon, 23 Feb 2026 07:04 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 23 Feb 2026 07:04 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में महिलाओं और कन्या भ्रूण के खिलाफ भेदभाव आम है। कन्या भ्रूण हत्या इसका सबसे भयानक रूप है। कोर्ट ने कहा कि गुरुग्राम के रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ PCPNDT एक्ट 1994 के तहत मामला रद्द नहीं किया जा सकता। आइए इस पूरे मामले को जानते हैं..

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Supreme Court Discrimination against women prevalent female foeticide crude manifestation such social malady
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिलाओं और खासकर कन्या भ्रूण हत्या मामले में अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि भारत के कई हिस्सों में महिलाओं और खासकर कन्या भ्रूण के खिलाफ भेदभाव आम है और कन्या भ्रूण हत्या इस सामाजिक बुराई की सबसे कड़ी और भयानक झलक है। कोर्ट ने गुरुग्राम के एक रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ PCPNDT एक्ट, 1994 के तहत दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश मनोज मिश्रा और उज्जल भूयान की पीठ ने कहा कि ट्रायल को शुरू होने से रोकना उचित नहीं है।

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मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कन्या भ्रूण का लिंग निर्धारित करना इस अपराध का पहला कदम है और संसद ने इसके लिए कड़े कानून बनाए हैं। PCPNDT कानून न केवल लिंग निर्धारण और चयन को रोकता है, बल्कि संबंधित प्री-कॉन्सेप्शन और प्री-नैटल तकनीकों के उपयोग और रिकार्ड रखने को भी अनिवार्य करता है।

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हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने से सुप्रीम इनकार
न्यायालय ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट ने गर्भवती महिला पर अल्ट्रासोनोग्राफी की थी और क्या उन्होंने कानूनी रूप से रिकार्ड रखा या लिंग नहीं बताया, यह ट्रायल में तय होगा। इसलिए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की आवश्यकता नहीं है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेडियोलॉजिस्ट के कार्यालय पर हुई छापेमारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। PCPNDT कानून के तहत जिला उचित प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में सिविल सर्जन ही जिम्मेदार हैं, लेकिन छापेमारी का आदेश सामूहिक निर्णय के बिना जारी किया गया था। इस आधार पर पीठ ने कहा कि छापेमारी अवैध मानी जा सकती है।

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PCPNDT कानून का उद्देश्य
सुनवाई के दौरान पीठ ने बताया कि PCPNDT एक्ट का मकसद है लिंग चयन और कन्या भ्रूण हत्या को रोकना, ताकि देश में घटते हुए लिंग अनुपात को सुधारा जा सके। कोर्ट ने जोर दिया कि विषम लिंग अनुपात के कारण महिलाओं के खिलाफ हिंसा, मानव तस्करी, दुल्हन खरीद जैसे अपराध बढ़ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह कानून कन्या बच्चे के जीवन के अधिकार (Article 21) की रक्षा के लिए बनाया गया है और इसका उद्देश्य सामाजिक दृष्टि से भेदभाव-मुक्त दुनिया सुनिश्चित करना है।

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