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SC: जर्जर हालत के कारण बंद पांच आश्रय गृहों की स्थिति पर डीयूएसआईबी से रिपोर्ट तलब, जानें पूरा मामला

Mon, 19 Feb 2024 06:51 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Mon, 19 Feb 2024 06:51 PM IST
सार

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत को बताया कि डीयूएसआईबी ने दांडी पार्क के पास पांच आश्रय गृहों को बंद कर दिया है, जिससे बेघर लोगों को सर्दियों में सड़कों पर रहना पड़ रहा है। 

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Supreme Court directs DUSIB to submit report on condition of five closed shelter homes in Delhi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में पांच आश्रय गृहों (शेल्टर होम) को बंद करने के मामले में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) से रिपोर्ट तलब की है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को डीयूएसआईबी को इन आश्रय गृहों की स्थिति बताते हुए तस्वीरों के साथ एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। इन पांच आश्रय गृहों को जर्जर हालत में होने के कारण बंद कर दिया गया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने डीयूएसआईबी के वकील से इन आश्रय गृहों की स्थिति के बारे में दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

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पीठ का यह निर्देश तब आया जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत को बताया कि डीयूएसआईबी ने दिल्ली के दांडी पार्क के पास पांच आश्रय गृहों को बंद कर दिया है, जिससे बेघर लोगों को सर्दियों में सड़कों पर रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 मार्च के अपने आदेश में उसकी अनुमति के बिना दिल्ली में शहरी बेघरों के लिए बने आश्रय गृहों को तोड़ने पर रोक लगा दी थी। लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद डीयूएसआईबी ने पांच शेल्टर होम पर ताला लगा दिया, जिससे लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। यह कोर्ट के आदेश की अवमानना है। भूषण ने कहा कि दिल्ली में एक से दो लाख लोग बेघर हैं, जबकि इसकी तुलना में शेल्टर होम 20 फीसदी भी नहीं हैं।
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डीयूएसआईबी के वकील का जवाब
वहीं, डीयूएसआईबी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि पिछले साल जून और जुलाई में यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण पांच आश्रय गृहों की स्थिति जर्जर हो गई थी। वकील ने कहा कि बोर्ड ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर प्रस्ताव दिया था कि इन आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों को स्थाई रूप से गीता कॉलोनी में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। मामला विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि पांच आश्रय गृह रहने लायक नहीं हैं। हालांकि, बोर्ड ने संकल्प लिया है कि इस सर्दी में ठंड से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं होगी।
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आश्रय गृहों में सुधार क्यों नहीं किया जा सकता...
इस पर अदालत ने पूछा कि आश्रय गृहों में सुधार क्यों नहीं किया जा सकता। डीयूएसआईबी के वकील ने कहा कि ये आश्रय गृह यमुना बाढ़ क्षेत्र में आते हैं। इसलिए इनमें सुधार करना संभव नहीं होगा। तब पीठ ने निर्देश दिया, आप इन पांच आश्रय गृहों की स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश करें। साथ ही बेघर लोगों के लिए गीता कॉलोनी में बने आवास की तस्वीरें भी प्रस्तुत करें। 


केरल के कर्ज सीमा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश पारित करना संभव नहीं 
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कर्ज लेने की सीमा के खिलाफ केरल सरकार की याचिका पर भी सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने कहा कि केरल सरकार को मानसिक रूप से खुद को तैयार करना चाहिए क्योंकि वह राज्य के वित्त में केंद्र के हस्तक्षेप का आरोप लगाने वाली याचिका पर केरल सरकार उसके पक्ष में अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकता है। सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को सूचित किया गया कि राज्य और केंद्र के बीच 15 फरवरी को हुई बैठक बेनतीजा रही। पीठ ने कहा, यह शुद्ध रूप से वित्तीय मामला है और इसमें कोई अदालत कितना हस्तक्षेप कर सकती है। वह भी अंतरिम आदेश के जरिये। हम इस विषय के विशेषज्ञ भी नहीं हैं। 
 

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