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सुप्रीम कोर्ट: इस्लाम के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने वाली पोस्ट पर ट्विटर के खिलाफ जांच की मांग, अगले हफ्ते होगी सुनवाई

Mon, 12 Jul 2021 03:16 PM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 12 Jul 2021 03:16 PM IST
सार

याचिकाकर्ता ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्लाम के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने वाली पोस्ट के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है।

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Supreme Court: Demand for investigation against Twitter on posts against Islam, Hearing on next week
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया, जिसमें निजामुद्दीन में पिछले साल हुए तबलीगी जमात कार्यक्रम के बाद कथित रूप से इस्लाम के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने वाली पोस्ट डाले जाने के मामले में ट्विटर और उसके यूजर्स के खिलाफ सीबीआई या एनआईए से जांच कराने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते में होगी।  इन पोस्ट में कोविड-19 संक्रमण के प्रसार के कारणों में से एक इसे भी बताया गया था।

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मामले की सुनवाई की शुरुआत में प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना ने अपनी निजी हैसियत से याचिका दायर करने वाले वकील खाजा ऐजाजुद्दीन से कहा, "वे इसे लेकर केंद्र के पास जाएं। याचिकाकर्ता ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्लाम के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने वाली पोस्ट सहित किसी भी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाने के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है।"
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पीठ ने पूछा- आपने नए आईटी नियम पढ़े?
पीठ ने यहां वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान वकील से पूछा, क्या आपने नए आईटी नियम पढ़े हैं? जैसे ही ऐजाजुद्दीन ने नए आईटी नियम पढ़ने शुरू किए पीठ ने कहा कि वह मामले पर एक सप्ताह बाद सुनवाई करेगी और इस बीच याचिकाकर्ता नियमों को पढ़कर तैयारी के साथ आ सकता है।
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ऐजाजुद्दीन ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल के उस आदेश के खिलाफ एक अपील दायर की थी, जिसमें उससे कहा गया था कि वह भारत में सभी ऑनलाइन सोशल मीडिया नेटवर्क को ‘इस्लाम के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने वाली’ पोस्ट डालने से रोकने का केंद्र को निर्देश देने को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाए।

याचिका में यह भी कहा गया कि कथित रूप से घृणा फैलाने के लिए ट्विटर और उसके उपयोगकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने के संबंध में केंद्र को निर्देश देने के अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को याचिका पर केवल विचार करने का निर्देश दिया। याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने उसके (प्राथमिकी दर्ज करने के बारे) किए गए अनुरोध पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया।


बता दें कि निजामुद्दीन में पिछले साल 13 मार्च से 15 मार्च तक तबलीगी जमात का कार्यक्रम आयोजित किया गया था और इसे देश में कोविड-19 संक्रमण को फैलने के कथित रूप से प्रमुख कारणों में से एक करार दिया गया था।

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