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सुप्रीम कोर्ट: चश्मदीदों के बयान दर्ज होने में देरी गवाही खारिज करने का आधार नहीं 

Sat, 16 Oct 2021 10:17 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 16 Oct 2021 10:17 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि हमारे सामने रखे गए रिकॉर्ड से साफ है कि दोषियों ने चश्मदीद गवाहों को डराने की पूरी कोशिश की, इसी वजह से देरी हुई। 

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Supreme Court: Delay in recording the statements of eyewitnesses is not a ground for dismissal of testimony
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा को चुनौती देने वाली चार दोषियों की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ चश्मदीदों के बयान दर्ज होने में देरी के आधार पर उनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट चार आरोपियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था। 

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जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट्ट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमारे सामने रखे गए रिकॉर्ड से साफ है कि दोषियों ने चश्मदीद गवाहों को डराने की पूरी कोशिश की। इसी डर के कारण इन लोगों ने बयान दर्ज कराने में देरी की। ऐसे में इस देरी को हम गलत नहीं ठहरा सकते। महज इस देरी के कारण इनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। 
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आरोपियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उनकी अपीलों को खारिज करने और सत्र न्यायाधीश द्वारा की गई दोषसिद्धि को चुनौती दी थी। आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि दो प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज करने में देरी हुई जो मामले में अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक होगा। इस बारे में भी कोई सफाई नहीं दी गई है कि गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी क्यों हुई।

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