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सुप्रीम कोर्ट: हरियाणा सरकार के खिलाफ अवमानना अर्जी खारिज, दिल्ली जल बोर्ड ने दायर की थी याचिका

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 23 Jul 2021 04:26 PM IST

सार

शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी है। दिल्ली को यमुना का पानी नहीं देने पर यह याचिका दायर की गई थी। 
 
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symbolic image - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के खिलाफ दिल्ली के जल बोर्ड द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। दिल्ली सरकार का आरोप था कि हरियाणा उसे शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार यमुना नदी का पानी साझा नहीं कर रहा है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड से हरियाणा सरकार से बातचीत करने के लिए कहा है। हालांकि याचिका दायर करने के बाद हरियाणा सरकार ने दिल्ली के लिए पानी जारी कर दिया था, इसलिए यह मामला कमजोर पड़ गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड की अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही शीर्ष अदालत में दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि वह इस मामले में याचिका पर याचिका न दायर करें। दरअसल, दिल्ली जल बोर्ड ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि हरियाणा, वर्ष1996 के आदेश के अनुसार दिल्ली को पानी सप्लाई नहीं कर रही है।


जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने अवमानना याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली सरकार को हरियाणा सरकार के साथ बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने जल बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिंह से पूछा कि आदेश के करीब 26 वर्षों के बाद यह अवमानना कैसे है? पीठ ने कहा कि हाल ही में हमारे द्वारा गठित कमेटी ने पाया था कि हरियाणा द्वारा आदेश के मुताबिक पानी की सप्लाई की जा रही है।

पीठ ने कहा कि हम आपको चेतावनी दे रहे हैं। कृपया सरकार को सलाह दीजिए कि वह याचिका पर याचिका दायर न करे। यह चौथी बार है। इस पर सिंह ने कहा कि हमें क्यों नहीं कानूनी विकल्प अपनाना चाहिए, यह हमारे अधिकार में आता है। सिंह ने कहा कि हरियाणा का कहना है कि वह कृषि के लिए पानी का उपयोग करेगी, लेकिन दिल्ली को घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी नहीं देगी। 

सिंह ने कहा कि 80 क्यूसेक पानी, नदी के द्वारा आना चाहिए लेकिन एक भी क्यूसेक पानी नहीं आ रहा है। यहां तक कि कमेटी की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि 37 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। अपर यमुना बोर्ड का कहना है कि वह कुछ नहीं कर सकता। वहीं हरियाणा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान में कहा कि इस याचिका को खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली सरकार बिना किसी आधार के अदालत पहुंच जाती है। यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। 

उन्होंने पीठ से कहा कि कमेटी की रिपोर्ट और सुझावों को देखने की जरूरत है। दीवान ने कहा कि हरियाणा, दिल्ली के लिए 1000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ रहा है। दीवान ने कहा कि दिल्ली को पानी को पानी की न्यूनतम जरूरत तो सप्लाई की ही जा रही है। अदालत द्वारा यह देखते हुए आदेश पारित किया गया था कि यमुना नदी, चैनल के तौर पर काम करेगी, लेकिन अब इसे बदल दिया गया है। दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी। जल बोर्ड की याचिका में कहा गया था कि 29 फरवरी 1996 के आदेश के तहत हरियाणा को वजीराबाद वाटर रिजर्व को भरा रखना है और इस आदेश का उल्लंघन किया गया है।

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