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Supreme Court: कॉलेजियम ने आठ जजों की स्थायी नियुक्ति को दी मंजूरी, लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी

Tue, 24 Mar 2026 10:03 PM IST
Himanshu Singh Chandel डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 24 Mar 2026 10:03 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आठ अतिरिक्त जजों को स्थायी नियुक्ति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में यह फैसला लिया गया। इस कदम से न्यायपालिका में जजों की कमी कम होगी और मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। यह निर्णय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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Supreme Court Collegium Approves Permanent Appointment of Eight Judges Disposal of Pending Cases to Expedite
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

न्यायपालिका में बड़े फैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट के आठ अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी जज बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के तौर पर देखा जा रहा है। कॉलेजियम की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया।
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कॉलेजियम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियुक्त अतिरिक्त जजों को स्थायी बनाने का फैसला लिया। मद्रास हाईकोर्ट के लिए न्यायमूर्ति आर पूर्णिमा, एम जोथिरामन और ऑगस्टीन देवदास मारिया क्लेटे के नाम मंजूर किए गए। वहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, राधाकिशन अग्रवाल, संजय कुमार जायसवाल, बिभू दत्ता गुरु और अमितेंद्र किशोर प्रसाद को स्थायी जज बनाने की स्वीकृति दी गई।
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कौन-कौन बने स्थायी जज?
मद्रास हाईकोर्ट में तीन और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पांच जजों को स्थायी नियुक्ति दी गई है। ये सभी पहले अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे और अब इन्हें पूर्णकालिक स्थायी जज के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह नियुक्ति उनके कामकाज और अनुभव को देखते हुए की गई है।
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 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इन स्थायी जजों की नियुक्ति
  • न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत
  • न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल
  • न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल
  • न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु
  • न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद

मद्रास हाईकोर्ट में इन स्थायी जजों की नियुक्ति
  • न्यायमूर्ति आर. पूर्णिमा
  • न्यायमूर्ति एम. जोथिरामन
  • न्यायमूर्ति ऑगस्टीन देवदास मारिया क्लेटे

क्या होता है अतिरिक्त से स्थायी जज बनने का मतलब?
अतिरिक्त जजों को आमतौर पर सीमित अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। उनके प्रदर्शन और जरूरत के आधार पर कॉलेजियम उन्हें स्थायी जज के रूप में नियुक्त करता है। स्थायी जज बनने के बाद उन्हें लंबी अवधि तक न्यायिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलता है और अदालत की स्थिरता बढ़ती है।
 
इस निर्णय से हाईकोर्ट में जजों की कमी कुछ हद तक पूरी होगी और मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। न्यायपालिका में लंबित मामलों का बोझ कम करने के लिए ऐसे फैसले अहम माने जाते हैं। इससे न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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