Supreme Court: अंडमान के उपराज्यपाल और मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद, कोर्ट ने दिए यह निर्देश
शीर्ष कोर्ट ने चार अगस्त को मुख्य सचिव केशव चंद्र को निलंबित करने और उपराज्यपाल जोशी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। श्रमिकों के पक्ष में दिए गए पूर्व के एक आदेश का अनुपालन नहीं करने को लेकर यह आदेश जारी किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डीके जोशी और मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद की। कोर्ट ने अंडमान और निकोबार प्रशासन से 30 नवंबर तक बकाया भुगतान करने और श्रमिकों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने को कहा।
दरअसल, श्रमिकों को मौद्रिक व अन्य लाभ देने संबंधी अपने पूर्व के एक आदेश का अनुपालन नहीं करने पर हाईकोर्ट की ओर से यह कार्यवाही शुरू की गई थी। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह प्रशासन को बकाये के भुगतान और श्रमिकों की नियमितीकरण योजना पर कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करने के लिए 30 नवंबर तक का समय दिया।
पीठ ने कहा कि नियमितीकरण योजना के सिलसिले मे यह कहा गया है कि एक सितंबर 2017 से बढ़ा हुआ पारिश्रमिक दिया जाए और केंद्र शासित क्षेत्र प्रशासन ने इसके लिए निधि की मांग की है। ऐसे में अवमानना कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
शीर्ष कोर्ट ने चार अगस्त को मुख्य सचिव केशव चंद्र को निलंबित करने और उपराज्यपाल जोशी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। श्रमिकों के पक्ष में दिए गए पूर्व के एक आदेश का अनुपालन नहीं करने को लेकर यह आदेश जारी किया गया था।
विवादों की वाद-पूर्व अनिवार्य मध्यस्थता से जुड़ी याचिका निस्तारित
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में भारी संख्या में लंबित मामलों को घटाने के लिए विवादों की वाद-पूर्व मध्यस्थता के उद्देश्य से केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका का सोमवार को निस्तारण कर दिया। वाद-पूर्व मध्यस्थता अदालत का रुख करने से पहले या वाद दायर करने या एक नोटिस भेजने से पहले पक्षों के बीच विवाद का एक न्यूट्रल (तटस्थ) तीसरे पक्ष (मध्यस्थ) की मदद से सौहार्द्रपूर्ण हल की कोशिश करना है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि यह जाहिर है कि जो कुछ शामिल करने का अनुरोध किया गया है वह सांविधिक प्रावधानों से संबद्ध है और मध्यस्थता विधेयक 2023 को लोकसभा ने पारित किया है। इसलिए हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे क्योंकि यह विधायिका के कार्यक्षेत्र का विषय है।