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सुप्रीम कोर्ट: हाई कोर्ट में स्थानीय भाषा के इस्तेमाल पर सीजेआई रमना का बयान, कहा- एआई की मदद से सुलझाया जाएगा 

Sat, 23 Apr 2022 07:28 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 23 Apr 2022 07:28 PM IST
सार

हाई कोर्ट में स्थानीय भाषा के इस्तेमाल पर न्यायमूर्ति रमना की टिप्पणी राज्य के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के बाद आई, जिन्होंने शनिवार को इस कार्यक्रम में भाग लिया था 

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Supreme Court CJI Ramana's statement on the use of local language in the High Court
चीफ जस्टिस एनवी रमना (file photo) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने शनिवार को कहा कि देश में संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषाओं की शुरुआत के संबंध में कुछ बाधाएं थीं, लेकिन इस मुद्दे को निकट भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित वैज्ञानिक नवाचार की मदद से सुलझाया जा सकता है। मद्रास हाई कोर्ट के नौ मंजिला प्रशासनिक ब्लॉक की आधारशिला रखने के बाद अपने संबोधन में जस्टिस रमना ने यह भी कहा कि तमिल लोग हमेशा देश में सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा करने में सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने इसका एक स्पष्ट संदर्भ दिया, 1960 के दशक में तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन।

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तमिल का उपयोग करने की अनुमति का मुद्दा उठा था 
हाई कोर्ट में स्थानीय भाषा के इस्तेमाल पर न्यायमूर्ति रमना की टिप्पणी राज्य के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की टिप्पमी के बाद आई, जिन्होंने शनिवार को इस कार्यक्रम में भाग लिया और अनुरोध किया कि मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में तमिल का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। सीजेआई ने कहा कि समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों से मांग की गई है कि संविधान के अनुच्छेद 348 के तहत उच्च न्यायालयों के समक्ष कार्यवाही में स्थानीय भाषा के उपयोग की अनुमति दी जाए। इस विषय पर बहुत बहस हुई है। उच्च न्यायालयों के समक्ष कार्यवाही के लिए स्थानीय भाषा को अपनाने से रोकने वाली बाधाएं हैं., लेकिन मुझे यकीन है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निकट भविष्य में इसे हल किया जा सकता है। 
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उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और उसे लागू करने का हमारा कर्तव्य है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक भारी बोझ है लेकिन हमने शपथ लेने के दिन खुशी से चुना है। यही कारण है कि न्यायिक संस्थानों को मजबूत करना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। चेन्नई के बारे में उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक राजधानियों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने कहा इसकी समृद्ध परंपराओं, कला, वास्तुकला, नृत्य, संगीत और सिनेमा के साथ लोगों के जीवन में गहराई से अंतर्निहित है।
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1960 के दशक में डीएमके के समय में उन्होंने हिंदी विरोधी आंदोलन के एक स्पष्ट संदर्भ में कहा कि तमिलवासी अपनी पहचान, भाषा, भोजन और संस्कृति पर बहुत ही गर्व करते हैं। वे देश में सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा करने में सबसे आगे हैं। आज भी जब हम लोग भारत की भाषाई विविधता के बारे में सोचते हैं, तो तमिलों द्वारा लड़ी गई लड़ाई हमें याद आती है। एक बच्चे के रूप में जब मैं शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने जाता था, मुझे भाषा के मुद्दे पर बड़े पैमाने पर विरोध देखने को मिलती था जो अभी भी मुझे याद है, हालांकि मैं इस मुद्दे को समझने के लिए उस समय बहुत छोटा था। 

तुरंत इंसाफ की असली इंसाफ नहीं होगा
जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि न्यायपालिका सहित आजकल सभी संस्थानों को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि आज का जमाना इंस्टैंट नूडल्स का है और लोग तुरंत इंसाफ की उम्मीद करते हैं। लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं होता कि अगर हम तुरंत इंसाफ देंगे तो यह असली इंसाफ नहीं होगा। जस्टिस रमना ने कहा कि न्याय देना न केवल एक संवैधानिक कर्तव्य है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों को सामाजिक वास्तविकताओं से अवगत होना चाहिए और उन्हें बदलती सामाजिक जरूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान से देखना चाहिए।

चीफ जस्टिस बोले: झटपट तैयार नूडल जैसा न्याय चाहते हैं लोग, ऐसा करना न्याय की हत्या
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण का कहना है कि झटपट तैयार नूडल और टी-20 क्रिकेट के दौर में लोग न्याय भी तुरंत चाहते हैं। ऐसा करना न्याय की हत्या होगी। मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने शनिवार को जजों से कहा कि वे अपने निर्णय में नियमों व प्रक्रिया को अंधे होकर लागू न करें, जल्दबाजी से बचें और सभी पक्षों को देखें।उन्होंने कहा कि निर्णय के दौरान मामले से जुड़े लोगों की सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि और इससे समाज पर पड़ने वाले असर को भी देखना चाहिए। लोग बुरे हालात में पड़ने पर न्यायपालिका की ओर देखते हैं। वे अपेक्षा रखते हैं कि अदालत उनके अधिकार दिलवाएगी। हमारे लिए लोगों तक पहुंचना, न्याय दिलाना और न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में सुधार लाना आज जरूरत बन गया है।


सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के लिए छह स्थायी जजों के नाम की सिफारिश की 
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के छह अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सीजेआई एनवी रमण की अध्यक्षता में 19 अप्रैल को हुई बैठक में वरिष्ठ न्यायाधीश यूयू ललित और जस्टिस एएम खनविलकर ने हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त न्यायाधीश को स्थायी जज नियुक्त करने की सिफारिश की है। वहीं, महिला जज केसांग डोमा भूटिया और अन्य पांच अतिरिक्त जजों- जस्टिस रबींद्रनाथ सामंत, जस्टिस सुगतो मजूमदार, जस्टिस बिभास पटनायक और जस्टिस आनंद कुमार मुखर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त करने की कॉलेजियम ने केंद्र से सिफारिश की है। 

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