केंद्र vs केजरीवाल: अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर किसका अधिकार? सुप्रीम कोर्ट में नौ नवंबर से रोज सुनवाई
केंद्र और दिल्ली सरकार की शक्तियों के दायरे के विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने तारीख तय कर दी है। इस मामले में अब सुनवाई नौ नवंबर को होगी।
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केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच जारी सेवाओं और अधिकारों के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ नौ नवंबर से दैनिक आधार सुनवाई शुरू करेगी। राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र और दिल्ली सरकार की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के दायरे से संबंधित कानूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए दिल्ली सरकार ने याचिका दायर की है। मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ सुनवाई करेगी। इसमें जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल हैं।
केवल सीमित मुद्दे पर होगी सुनवाई
पीठ ने साफ किया सुनवाई केवल सीमित मुद्दे पर होगी, जिसमें सेवाओं के संबंध में केंद्र और एनसीटी दिल्ली की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के दायरे व नियंत्रण से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
सेवा शब्द के प्रभाव की व्याख्या की जरूरत नहीं
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 239एए (3)(ए) की व्याख्या करते हुए कहा कि राज्य सूची में प्रविष्टि 41 के संबंध में सेवा शब्द के प्रभाव की विशेष रूप से व्याख्या की जरूरत नहीं है। हालांकि, कानूनी सवालों पर वह विस्तार से होगा, जिसमें दिल्ली विधानसभा की विधायी शक्तियां व जीएनसीटीडी अधिनियम, 2021 की वैधता को दिल्ली सरकार की तरफ से दी गई चुनौती भी शामिल है।
दो जजों की पीठ ने तीन साल पहले दिया था विभाजित फैसला
14 फरवरी, 2019 को जस्टिस एके सीकरी व जस्टिस भूषण की पीठ के विभाजित फैसले के बाद दिल्ली सरकार ने यह याचिका दायर की थी। जस्टिस भूषण ने फैसला दिया था कि दिल्ली सरकार के पास सभी प्रशासनिक सेवाओं का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस भूषण ने अपने फैसले में कहा, संयुक्त निदेशक और इससे ऊपर के नौकरशाहों का स्थानांतरण या पदस्थापन केवल केंद्र सरकार कर सकती है। हालांकि, जस्टिस सीकरी इससे सहमत नहीं थे।
फिलहाल ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एलजी के पास
बता दें कि पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में संशोधन के बाद से अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एलजी यानी उपराज्यपाल के पास है। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ये मामला दिल्ली अधिनियम से हुए संशोघन से भी जुड़ा है।
क्या कहना है दिल्ली सरकार का
दिल्ली सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में केंद्र सरकार के पास सिर्फ जमीन, पुलिस और लोक आदेश यानी कानून व्यवस्था के मामले में अधिकार मिला है, इसलिए वह इन्हीं से संबंधित अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग कर सकती है। लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को चलाने से संबंधित गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली एक्ट में 2021 में संशोधन किया था जिसके तहत उपराज्यपाल को कई और अधिकार दे दिए गए थे। दिल्ली सरकार ने इस संशोधन को भी चुनौती दी है।