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सुप्रीम कोर्ट: पिछड़े वर्ग से होने के कारण नियमों में छूट नहीं; अदालत ने कहा- सरकारी नौकरी में दान-दया असंभव

Mon, 06 Apr 2026 05:23 AM IST
Pavan राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 06 Apr 2026 05:23 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि पिछड़े वर्ग से होने के कारण नियमों में छूट नहीं दी जा सकती है। अदालत ने आगे कहा- सरकारी नौकरी में दान-दया की कोई गुंजाइश नहीं है। दरअसल, अभ्यर्थी सर्दी जुकाम के कारण परीक्षण तिथि से अनुपस्थित था और उसे दोबारा मौका मिला क्योंकि वो पिछड़े वर्ग से था।

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Supreme Court: Being from backward class does not exempt rules; court-charity is impossible in govt employment
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में नियम और अनुशासन ही सर्वोपरि हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में दो टूक कहा है कि महज पिछड़े समुदाय से संबंध रखने के आधार पर किसी उम्मीदवार का पलड़ा भारी नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चैरिटी (दान) या सहानुभूति के लिए कोई जगह नहीं है। सामाजिक पृष्ठभूमि की आड़ में नियमों को तोड़ना या ढील देना अन्य योग्य उम्मीदवारों के साथ घोर अन्याय है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कड़े मुकाबले वाली भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है।
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पीठ ने कहा कि यदि भर्ती के नियमों में साफ तौर पर लिखा है कि किसी भी चरण के लिए कोई दूसरा अवसर नहीं मिलेगा तो यह नियम हर उम्मीदवार पर समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी क्यों न हो। यह पूरा विवाद दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल उत्तम कुमार नामक एक अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता एवं माप परीक्षण की तय तारीख पर गैर-हाजिर रहा था। बाद में उसने अपनी अनुपस्थिति की वजह महज सर्दी-जुकाम बताते हुए विभाग से एक और मौका देने की गुहार लगाई। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी के प्रति सहानुभूति जताते हुए दिल्ली पुलिस को उसे दूसरा अवसर देने का निर्देश दिया था।
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लापरवाह रवैया और उत्साह की कमी
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि भर्ती प्रक्रिया में समय का पाबंद होना अत्यंत आवश्यक है। यदि कोई उम्मीदवार तय समय पर परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उसे बाद में मौका देना अन्य प्रतिस्पर्धियों के अधिकारों का हनन है।
  • अदालत ने माना कि बिना उपस्थित हुए बाद में दूसरे मौके की मांग करना यह दर्शाता है कि अभ्यर्थी में नौकरी के प्रति जरूरी उत्साह और पहल की भारी कमी है, जो बल (पुलिस) की नौकरी के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस की अपील को स्वीकार करते हुए कैट और हाईकोर्ट दोनों के आदेशों को सिरे से रद्द कर दिया। कोर्ट ने उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि अभ्यर्थी पिछड़े वर्ग से है, इसलिए उसे यह राहत दी जानी चाहिए। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थी की दोबारा मौका देने की मांग को खारिज कर दिया।

 
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