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Supreme Court: पुणे में सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ कटाई पर रोक, हिरासत के खिलाफ रोहिंग्या युवती को झटका

Mon, 18 Dec 2023 06:41 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Mon, 18 Dec 2023 06:41 PM IST
सार

Supreme Court: पुणे शहर की सड़क चौड़ीकरण में कटने वाले पेड़ों पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। वहीं हिरासत के खिलाफ दायर रोहिंग्या युवती की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। 

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Supreme Court: Ban on cutting of trees during road widening in Pune, shock for Rohingya girl against detention
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे नगर निकाय को शहर की एक सड़क को चौड़ी करने के लिए 21 दिसंबर तक पेड़ काटने से रोक दिया है। पुणे नगर निगम (पीएमसी) ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय जंक्शन से संचेती चौक तक गणेशखिंड रोड को मौजूदा 36 मीटर से बढ़ाकर 45 मीटर करने का फैसला लिया है।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नजमी वजीरी की दलीलों पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि गुरुवार तक सड़क को चौड़ा करने के लिए कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।
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अपीलकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का मिलेगा उचित समय- सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान आदेश में पीठ ने कहा कि अपीलकर्ताओं को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए उचित समय देने के लिए हम निर्देश देते है कि आदेश की तारीख से लेकर 21 दिसंबर की शाम तक पेड़ों की कटाई नहीं होगी। अमीत गुरुचरण सिंह द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि वह उचित निर्णय लेने के लिए मामले को उच्च न्यायालय पर छोड़ रही है, इसलिए उसके आदेश को गुण-दोष के आधार पर राय की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं माना जाएगा।
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इसमें कहा गया है कि गणेशखिंड रोड को चौड़ा करने के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति देने में पुणे नगर निगम द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया से संबंधित इस वर्ष अक्तूबर में एक संगठन 'परिसर संरक्षण संवर्धन संस्था' द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

हिरासत के खिलाफ रोहिंगा युवती की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
वहीं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत से रिहाई की मांग करने वाली रोहिंग्या युवती की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसकी आवाजाही पर प्रतिबंध को अवैध कारावास की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। 

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें दावा किया गया था कि युवती को उसके खिलाफ कोई अपराध दर्ज किए बिना विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था। पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रिट याचिका खारिज की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता निश्चित रूप से एक अवैध आप्रवासी है और उसके भारत आगमन का पता नहीं लगाया जा सकता है।
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