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मध्यप्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की कांग्रेस की याचिका, राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट आदेश को बताया सही
Mon, 13 Apr 2020 12:28 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 13 Apr 2020 12:28 PM IST
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शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
कोरोना वायरस महामारी संकट के बीच उच्चतम न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई कर रही है। इसी कड़ी में शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरफ से दायर याचिका पर फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि मार्च में राज्यपाल द्वारा बहुमत परीक्षण का आदेश देना सही था।
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Madhya Pradesh govt formation case: SC said, this is a 68-page judgment on powers of the Governor. "Have given a detailed judgment on Constitutional law and powers of Governor", said Justice DY Chandrachud https://t.co/K3OcfIqYn7
— ANI (@ANI) April 13, 2020विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक मनु सिंघवी की तरफ से दिए उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्यपाल इस तरह का आदेश नहीं दे सकते हैं। यानी अदालत ने कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्यपाल ने तब खुद कोई फैसला न लेते हुए बहुमत परीक्षण कराने को कहा था।
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एक चलती हुई विधानसभा में दो तरह के ही विकल्प बचते हैं जिसमें बहुमत परीक्षण और अविश्वास प्रस्ताव ही होता है। अदालत ने इस दौरान राज्यपाल के अधिकारों को लेकर एक विस्तृत आदेश भी जारी किया है। राज्य के राज्यपाल लालजी टंडन ने सियासी उठापटक के बीच विधानसभा में बहुमत परीक्षण का आदेश दिया था।
हालांकि जब सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो विधानसभा अध्यक्ष ने कोरोना वायरस के कारण सदन को कुछ दिनों के लिए टाल दिया था। जिसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंच गया था। मार्च में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
जिसके बाद उनके समर्थन में 20 से ज्यादा विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्य की तत्कालीन कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। तब कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए थे। फिर तुरंत शीर्ष अदालत में विधानसभा में बहुमत परीक्षण को लेकर याचिका दायर की गई थी। हालांकि कमलनाथ ने बहुमत परीक्षण से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।