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'कूड़े' पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- उपराज्यपाल के घर के बाहर क्यों नहीं फेंकते कचरा

Tue, 07 Aug 2018 05:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Aug 2018 05:46 AM IST
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Supreme court asks to authority why not throwing garbage outside the house of the lt governor

देश की राजधानी दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन की स्थिति को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आपातकाल जैसे हालात करार दिया। कूड़ा प्रबंधन पर अथॉरिटी के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में दिल्ली में कोई व्यक्ति जिंदा कैसे रह सकता है। कोर्ट ने कचरा प्रबंधन योजना को लागू करने और घरेलू कचरे को पृथक किए जाने की तैयारियों के बारे में अथॉरिटी से विस्तृत कार्ययोजना पेश करने को कहा। 

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जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने अथॉरिटी को घरेलू कचरे को अलग करने को लेकर डिफेंस कॉलोनी, लाजपत नगर और ग्रीन पार्क में शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी देने के लिए कहा है। साथ ही पीठ ने अथॉरिटी को यह भी बताने के लिए कहा कि इसमें उसे क्या परेशानी आ रही है।
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सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद द्वारा यह कहने पर कि सोनिया विहार में लैंडफिल बनाने का लोग विरोध कर रहे हैं, इस पर पीठ ने सख्त आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि लोगों को इसका विरोध करने का हक है। किसी के भी घर के सामने कूड़ा फेंका जाएगा तो वह विरोध करेगा ही। आम लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं किया जा सकता। सोनिया विहार में आम लोग रहते हैं तो क्या उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जाएगा। 
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पीठ ने कहा कि क्यों नहीं स्थानीय निकाय राजनिवास मार्ग (उपराज्यपाल का निवास) पर कूड़ा फेंकती है। पीठ ने पिंकी आनंद से कहा कि आपके कहने का मतलब है कि लोग विरोध भी न करें। जैसा 1975 (आपातकाल के दौरान) में होता था, क्या आप चाहती है फिर वैसा हो। अगर किसी ने आपकी बात नहीं मानी तो आप जेल भेज देंगी। किसी के घर के सामने कूड़ा डालना अपराध है। इसका उचित समाधान निकालना होगा। पीठ ने कहा कि यह आपातकाल जैसी स्थिति है लेकिन अथॉरिटी इसका समाधान निकालने की कोशिश नहीं कर रही है। पीठ ने अथॉरिटी को 14 अगस्त तक इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। 

मलबा डालने पर क्यों नहीं लगाया जाए जुर्माना

पीठ ने कहा कि कचरा कई तरीके के होते हैं। मसलन सूखा, गीला, हानिकारक। अलग-अलग कचरे का अलग-अलग तरीके से निपटारा होना चाहिए। साथ ही पीठ ने कहा कि क्या मलबा डालने वाले पर जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि कचरे को अलग करने की शुरुआत क्यों नहीं घर से की जाए। क्यों न लोग अलग-अलग कचरे को खुद अलग-अलग करें। पीठ ने कहा कि इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। 


1800 टन कचरा ही लैंडफिल में डाला जाता है, आगे क्या होगा

पीठ ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इलाके से ही हर दिन 3600 टन कचरा जमा होता है। इनमें से महज 1800 टन कचरा ही लैंडफिल में डाला जाता है। आपके कचरा प्रसंस्करण इकाई दिसंबर तक शुरू होंगी। ऐसे में आपको अंदाजा है तब तक कितना और कचरा इकट्ठा हो जाएगा। साथ ही पीठ ने कहा कि सर गंगा राम अस्पताल के सर्वे मुताबिक, दिल्ली की 50 फीसदी आबादी को फेफड़े का कैंसर होने का खतरा है भले ही वह सिगरेट या बीड़ी न पीता हो। नीति आयोग ने भी कहा है कि वर्ष 2019 में दिल्ली में पानी की भारी किल्लत होगी। क्या ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति दिल्ली में जीवित रह सकता है।     

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