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Supreme Court: 'छूटे हुए प्रवासी मजदूरों को 2 महीने में उपलब्ध कराएं राशन कार्ड', सरकारों को 'सुप्रीम' निर्देश
Tue, 19 Mar 2024 10:18 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 19 Mar 2024 10:18 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोक्कर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राशन के कोटे की परवाह किए बिना प्रवासी मजदूरों को राशन देने की मांग की थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के हितों को देखते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उन्हें राशन कार्ड जारी करने का निर्देश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी मजदूरों को दो महीने के भीतर राशन कार्ड उपलब्ध कराए जाएं।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत निर्धारित कोटा के बावजूद राशन कार्ड जारी किए जाने चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अधिकारी अदालत के 20 अप्रैल, 2023 के निर्देशों का पालन करने में फेल साबित हुए हैं। अदालत ने कहा कि पहले के आदेश में मजदूरों को राशन कार्ड प्रदान करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
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शीर्ष अदालत ने अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोक्कर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राशन के कोटे की परवाह किए बिना प्रवासी मजदूरों को राशन देने की मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे वकील प्रशांत भूषण और चेरिल डिसूजा ने बताया कि एनएफएसए के तहत राशन पाने वाले व्यक्तियों का कवरेज नवीनतम जनगणना के आधार पर निर्धारित किया जाना है। उन्होंने कहा, 'चूंकि 2021 की जनगणना नहीं की गई है, जनसंख्या में वृद्धि होने के बावजूद कवरेज 2011 की जनगणना के आधार पर जारी है। इसके चलते 10 करोड़ से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गए हैं।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने प्रवासी श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की मांग करने वाले तीन कार्यकर्ताओं की याचिका पर अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए थे। शीर्ष कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि जब तक कोविड महामारी रहेगी तब तक उन्हें मुफ्त सूखा राशन उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं तैयार की जाएं।
इससे पहले मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि प्रवासी श्रमिक राष्ट्र के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मामले में केंद्र से एक तंत्र तैयार करने को भी कहा था ताकि उन्हें बिना राशन कार्ड के खाद्यान्न प्राप्त हो सके।