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Elgar case: पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को उच्च न्यायालय जाने को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Wed, 16 Jul 2025 03:47 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 16 Jul 2025 03:47 PM IST
सार

एनआईए के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका विचारणीय नहीं है और एनआईए अदालत में नई ज़मानत याचिका दायर की जानी चाहिए।

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Supreme court asks ex-DU professor Hany Babu to move High court or trial court for bail
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को एल्गर परिषद-माओवादी संबंध मामले में जमानत के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय या निचली अदालत जाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने बाबू की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस बिंदु पर स्पष्टीकरण मांगा था कि उनकी पिछली अपील वापस लेने के चलते हाईकोर्ट उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार तो नहीं करेगा।
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उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगने का दिया था निर्देश
गौरतलब है कि हनी बाबू ने पिछले साल 3 मई को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली थी क्योंकि उन्होंने हाईकोर्ट जाने का फैसला किया था। उनके वकील ने तब कहा था कि हाईकोर्ट ने मामले में पांच सह-आरोपियों को जमानत दे दी है। जब बाबू ने हाईकोर्ट का रुख किया, तो कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उन्हें हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता नहीं दी गई है और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगने को कहा।
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याचिकाकर्ता ने दी ये दलीलें
बाबू के वकील ने बुधवार को दलील दी कि उन्होंने विचाराधीन कैदी के रूप में पांच साल बिताए हैं और उच्च न्यायालय जाने के लिए उन्होंने शीर्ष अदालत से विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली। एनआईए के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका विचारणीय नहीं है और एनआईए अदालत में नई ज़मानत याचिका दायर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय एक अपीलीय न्यायालय है और यह मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के आरोपों से संबंधित है।
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इसके बाद पीठ ने कहा, 'आपका प्राथमिक आधार यह है कि किसी अन्य आरोपी को ज़मानत दी गई है, जिस पर निचली अदालत भी विचार कर सकती है।' शीर्ष अदालत ने आगे टिप्पणी की कि वह उच्च न्यायालय को उनकी ज़मानत याचिका पर विचार करने का निर्देश नहीं दे सकती और बाबू को पिछले साल वापस ली गई अपनी पिछली अपील को फिर से शुरू करने की स्वतंत्रता प्रदान की। एनआईए ने बाबू पर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के नेताओं के निर्देश पर माओवादी गतिविधियों और विचारधारा का प्रचार करने में सह-साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया है। बाबू को इस मामले में जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद है।

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