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व्हाट्सएप द्वारा शिकायत निदान अधिकारी नियुक्त न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली, भाषा
Updated Mon, 27 Aug 2018 03:20 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप द्वारा शिकायत निदान अधिकारी नियुक्त नहीं करने के मामले में आज केंद्र सरकार और व्हाट्सएप से जवाब मांगा है। यह जवाब उस याचिका पर सुनवाई के दौरान मांगा गया जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करने के प्रावधान और भारत के दूसरे कानूनों का पालन नहीं कर रहा है।
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न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने 'सेन्टर फॉर एकाउन्टेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज' की याचिका पर केंद्र और व्हाट्सएप को नोटिस जारी किये।
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इस संगठन की याचिका में अनुरोध किया गया है कि सोशल मीडिया समूह को भारतीय रिजर्व बैंक के प्रावधानों पर पूरी तरह से अमल के बगैर अपनी भुगतान प्रणाली पर आगे बढ़ने से रोका जाये। केंद्र और व्हाट्सएप को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है।
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गौरतलब है कि व्हाट्सएप पहले ही कह चुका है कि वो भारत सरकार की नीतियों में भेदभाव का अनुभव कर रहा है। ऐसे में उसे यहां अपना बिजनेस बंद करने का फैसला भी लेना पड़ सकता है। व्हाट्सएप से सरकार का विवाद फर्जी संदेशों को लेकर के बढ़ गया है। सरकार ने व्हाट्सएप से कहा है कि वो फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने के लिए अपनी तकनीक में बदलाव करे, जिससे ऐसे लोगों को पकड़ा जा सके। यह करने के बाद ही कंपनी को अपनी पेमेंट सेवा शुरू करने की इजाजत दी जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने व्हाट्सएप से कहा था कि वो अपने सर्वर देश में स्थापित करे। इसके लिए कंपनी अपनी तरफ से आंशिक तौर पर तैयार भी हो गई है, लेकिन सरकार का कहना है कि वो पूरी तरह से भारत में ही अपने सर्वर को स्थापित करे।
व्हाट्सएप ने सरकार से कहा है कि वो किसी भी संदेश को पकड़ नहीं सकते हैं कि वो कहां से चला है। इसके लिए उसे अपने इनक्रिप्शन पॉलिसी में बदलाव करना पड़ेगा जो कि फिलहाल संभव नहीं है। व्हाट्सएप किसी भी सूरत में अपनी इस प्राइवेसी पॉलिसी पर भी असर पड़ेगा।
अगर इस तरह का नियम लागू करने की सरकार कोशिश करती है तो उसे भारत से अपना व्यापार समेटना पड़ सकता है। व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह का साफ्टवेयर बनाने से एक किनारे से दूसरे किनारे तक कूटभाषा प्रभावित होगी और व्हाट्सएप की निजी प्रकृति पर भी असर पड़ेगा। ऐसा करने से इसके दुरुपयोग की और संभावना पैदा होगी। हम निजता संरक्षण को कमजोर नहीं करेंगे।