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सुप्रीम कोर्ट: केंद्र से ईडब्लूएस के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय मानदंड तय करने का कारण पूछा

Thu, 07 Oct 2021 09:32 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 07 Oct 2021 09:32 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि आखिर आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले व्यक्ति की वार्षिक आय को उत्तर प्रदेश के एक दूरस्थ गांव में रहने वाले लोगों के साथ तुलना नहीं की जा सकती है, भले ही उनकी आय एकसमान क्यों न हो।

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Supreme Court Asked the Modi Govt the reason for fixing the annual income criterion of Rs 8 lakh for EWS Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आर्थिक रूप से पिछले श्रेणी (ईडब्ल्यूएस) घोषित करने के लिए आठ लाख रुपए वार्षिक आय को मानदंड के रूप में तय करने के कारण बताने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आखिर आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से कैसे लागू नहीं किया जा सकता है। जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज से पूछा, 'आठ लाख रुपए का मानदंड तय करने के लिए आपने क्या अभ्यास किया? या आपने ओबीसी पर लागू होने वाली मानदंड को स्वीकार कर लिया।'

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पीठ ने कहा कि आखिर आय के मानदंड को पूरे देश में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले व्यक्ति की वार्षिक आय को उत्तर प्रदेश के एक दूरस्थ गांव में रहने वाले लोगों के साथ तुलना नहीं की जा सकती है, भले ही उनकी आय एकसमान क्यों न हो। शीर्ष अदालत ने यह सवाल नील ऑरेलियो नून्स और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उठाया जिसमें
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देशभर के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय कोटा में ओबीसी व ईडब्ल्यूएस कोटा को लागू करने के लिए केंद्र की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। नीट के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों में से मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में 15 फीसदी सीटें और एमएस व एमडी कोर्स में 50 फीसदी सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरी जाती हैं।
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एएसजी नटराज ने तर्क दिया कि आरक्षण लागू करना नीति का विषय है। इस पर पीठ ने पूछा, 'आठ लाख रुपए के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपने क्या अभ्यास किया या आपने सिर्फ वही किया जो ओबीसी के लिए लागू था।'

पीठ ने इंद्रा साहनी (मंडल मामला) के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि जिनकी आय आठ लाख रुपये से कम है वे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन व आर्थिक पिछड़ेपन के मानदंड को पूरा करते हैं। पीठ ने नटराज से कहा, 'यहां हम शुद्ध आर्थिक पिछड़ेपन से निपट रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि केंद्र ने क्या अभ्यास किया है? अधिसूचना विशेष रूप से आठ लाख रुपए का जिक्र है। लेकिन अब आपके पास 17 जनवरी का कार्यालय ज्ञापन है जिसमें संपत्ति के साथ आठ लाख रुपये शामिल हैं। क्या आप संपत्ति सह आय को लागू कर रहे हैं।' 


नटराज ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। पीठ ने कहा, 'जब हम पूछ रहे हैं कि ईडब्ल्यूएस पात्रता के लिए आठ लाख रुपए का आधार क्या है तो आप यह नहीं कह सकते कि यह नीति का मामला है।' नटराज ने कहा कि इसके लिए विचार-विमर्श किया गया था। लेकिन अदालत ने उनसे डेटा या इसके लिए किए गए अध्ययन को प्रदर्शित करने के लिए कहा। शीर्ष अदालत अब इस मामले को 20 अक्टूबर को विचार करेगी।

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