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Supreme Court: 13 साल से युवक चेतनाशून्य, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी इच्छामृत्यु पर राय

Fri, 12 Dec 2025 05:07 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 12 Dec 2025 05:07 AM IST
सार

बीते 13 वर्षों से बिस्तर पर पड़े एक युवक को इच्छा मृत्यु देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के सेकेंडरी बोर्ड से राय मांगी है। युवक की देखभाल भी ठीक से नहीं हो रही है।

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supreme court ask opinion from aiims on euthanasia person bed ridden last 13 years
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 31 वर्षीय हरीश राणा के मामले में एम्स को एक सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है। हरीश पिछले 13 साल से 100 प्रतिशत दिव्यांगता (क्वाड्रिप्लेजिया) के साथ चेतनाशून्य स्थिति में हैं। अदालत ने कहा कि वह उसे इस हाल में और नहीं रहने दे सकती। यह जांच जरूरी है कि क्या इच्छामृत्यु के लिए उसके इलाज को बंद किया जा सकता है। इच्छामृत्यु का मतलब है जीवन बनाए रखने वाले इलाज या लाइफ सपोर्ट को रोक देना।
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सुप्रीम कोर्ट ने सेकेंडरी बोर्ड से मांगी राय
नोएडा के एक अस्पताल की प्राथमिक रिपोर्ट देखने के बाद जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि मरीज की हालत बेहद दुखद है और उसके सुधरने की कोई संभावना नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया कि हरीश को गंभीर बेडसोर्स हैं, जो यह भी दिखाते हैं कि उनकी देखभाल ठीक से नहीं हो पा रही। अदालत ने कहा कि अगला कदम सेकेंडरी बोर्ड की राय लेना है। कोर्ट ने सभी दस्तावेज एम्स के निदेशक को भेजने का आदेश दिया और अगले बुधवार तक रिपोर्ट मांगी।
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दूसरी बार कोर्ट पहुंचे माता-पिता
यह दूसरा मौका है जब हरीश के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से हरीश के लिए इच्छामृत्यु की मांग की है। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हरीश 2013 में चौथी मंजिल से गिरने के बाद से पूरी तरह बिस्तर पर हैं और लंबे समय से कृत्रिम सहायता पर निर्भर जीवन जी रहे हैं।
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क्या है चेतनाशून्य अवस्था
चेतनाशून्य अवस्था एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति जाग तो रहा होता है, यानी आंखें खुली होती हैं, पर उसमें अपने या आसपास के वातावरण के प्रति कोई जागरूकता नहीं होती। केवल कुछ शारीरिक क्रियाएं जैसे नींद-जागने का चक्र जारी रहती हैं। 

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