सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा: यह राष्ट्रीय संकट, लोगों की जान बचाने के लिए जो भी संभव हो, वह करें
- केंद्र सरकार ने कहा, ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं, हर दिन 10 हजार मीट्रिक टन उपलब्धता
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सोशल मीडिया पर मदद मांगने वालों पर न हो कार्रवाई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी को राष्ट्रीय संकट करार देते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि लोगों की जान बचाने के लिए जो भी संभव हो, उसे करना चाहिए।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, दिल्ली राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है और शायद ही कोई खांटी दिल्लीवासी है। भूल जाइए कि कोई ऑक्सीजन उठा पा रहा है या नहीं। आपको जान बचानी ही होगी। केंद्र के रूप में आपके पास एक विशेष जिम्मेदारी है। मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होगी।
वहीं, पीठ के समक्ष सरकार ने बताया कि देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या भारत में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है, जबकि हर दिन 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की औसत मांग है।
जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रोजाना के आधार पर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
हालांकि, कुछ राज्यों द्वारा कम ऑक्सीजन लेने के कारण कुछ क्षेत्रों में इसकी कमी हो जाती है। इससे पहले जस्टिस चंद्रचूड़ की विशेष पीठ ने कोविड-19 प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई की शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत में केवल राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों का ही परीक्षण करेगी।
केंद्र से तल्ख सवाल.....
निजी निर्माता नहीं तय कर सकते कि किस राज्य को कितना टीका मिले
शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी टीका निर्माताओं को यह तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि किस राज्य को कितना टीका मिलना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र को कोविड-19 की तैयारी पर पूरा ब्योरा मांगा है। बीते 22 अप्रैल को ही कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र से राष्ट्रीय योजना मांगी थी।
कीमतों में अंतर क्यों, केंद्र 100 फीसदी टीका क्यों नहीं खरीद लेता
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि केंद्र सरकार 100 फीसदी टीकों की खरीद क्यों नहीं करती? केंद्र इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के मॉडल पर राज्यों को वितरित क्यों नहीं करती, ताकि टीकों के दाम में अंतर न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरकार यह देश के नागरिकों के लिए है। सरकार को सभी नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण प्रदान करने के बारे में सोचना चाहिए।
निरक्षर लोग कैसे लगवाएंगे टीके
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि निरक्षर और जिनके पास इंटरनेट नहीं है, वे टीका कैसे लगवाएंगे? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि पिछले एक साल में केंद्र सरकार ने टीका बनाने वाली कंपनियों पर कितना निवेश किया और कितनी अग्रिम राशि दी? टीकों के विकास पर अनुसंधान आदि में केंद्र सरकार का वित्तीय योगदान क्या है?
सोशल मीडिया पर मदद मांगने वालों पर न हो कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कोरोना महामारी के संकट के इस दौर में सोशल मीडिया के जरिये मदद की अपील करने वालों के खिलाफ एफआईआर या अन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
अगर किसी राज्य सरकार या अथॉरिटी के द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है तो उसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि हमें अपने नागरिकों की आवाज सुननी चाहिए न कि उनकी आवाज दबानी चाहिए।
पीठ ने कहा, अगर कोई नागरिक सोशल मीडिया व इंटरनेट के माध्यम से शिकायत करता है तो यह नहीं कहा जा सकता है कि वह जानकारी गलत है। हम नहीं चाहते हैं कि किसी जानकारी को दबाया जाए। अगर इस तरह की शिकायतों पर कार्रवाई की गई तो हम उसे अवमानना मानेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सभी राज्यों व पुलिस महानिदेशकों तक यह संदेश जाना चाहिए। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि कोविड को लेकर मदद मांगने के नाम पर सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार करने वालों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जा सकती है
डॉक्टरों को भी नहीं मिल पा रहे बेड, गंभीर हालात
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा, अग्रिम मोर्चे के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी इलाज के लिए बेड नहीं मिल पा रहे थे और बीते 70 साल में विरासत में मिली स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और हालात गंभीर है। पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
छात्रावास, मंदिर और चर्च को बनाएं कोविड देखभाल केंद्र
शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रावासों, होटलों, मंदिरों, चर्चों और अन्य स्थानों को कोविड-19 देखभाल केंद्र के रूप में परिवर्तित करने के लिए खोला जाए।
क्या गरीबों को निजी अस्पतालों की दया पर छोड़ देना चाहिए?
पीठ ने कहा, गरीब लोग पैसा देकर टीका नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में केंद्र को राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल अपनाना चाहिए। अनुसूचित जाति/जनजाति आबादी और हाशिए पर खड़े लोगों का क्या होगा? क्या उन्हें निजी अस्पतालों की दया पर छोड़ देना चाहिए? 18 से 45 वर्ष के बीच की आबादी का वास्तविक आंकड़ा क्या है?
सेवानिवृत्त डॉक्टरों को फिर से काम पर लाएं
कोर्ट ने कहा, देश का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र बदतर स्थिति में आ गई है। ऐसे में सेवानिवृत्त डॉक्टरों या अधिकारियों को इस संकट की घड़ी में फिर से नियोजित किया जा सकता है।
राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है दिल्ली, केंद्र सरकार की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण : सुप्रीम कोर्ट
कोविड- 19 की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए बिलख रही दिल्ली पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा है कि लोगों की जान बचाने के लिए जो भी संभव हो, उसे करना चाहिए।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रविन्द्र भट्ट की पीठ ने केन्द्र सरकार की और से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, दिल्ली, राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है और शायद ही कोई खाटी दिल्लीवासी है। भूल जाइए कि कोई ऑक्सीजन नहीं उठा पा रहा है या नहीं। आपको जान बचानी होगी। केंद्र के रूप में आपके पास एक विशेष जिम्मेदारी है।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने मेहता से कहा कि दिल्ली की मांग बढ़ गई है। ऑक्सीजन की संशोधित जरूरत 700 मीट्रिक टन है, लेकिन सिर्फ 490 मीट्रिक टन ही दिया जा रहा है। आपको 200 मीट्रिक तन दिल्ली को मुहैया कराया जाना चाहिए। जहां तक दिल्ली की नागरिको बात है कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आप कह रहे हैं कि स्टील क्षेत्र में सरप्लस ऑक्सीजन है तो क्यों नहीं इसे दिल्ली को दिया जाना चाहिए। आज से सोमवार के बीच 500 लोगों की जिंदगी हमारे हाथों में है।
वहीं जस्टिस भट्ट ने कहा कि दिल्ली औद्योगिक शहर नहीं है, ऐसे में सभी को एक जैसा नहीं समझा जाना चाहिए। टैंकरों की खरीद में केंद्र सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जवाब में मेहता ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई न होने के कारण 500 लोगों की मौत नहीं हो रही है।
पीठ ने केंद्र से कहा, राष्ट्रीय अथॉरिटी होने के नाते देश की राजधानी के प्रति आपकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आप नागरिकों के प्रति जवाबदेह हैं। दिल्ली सरकार को भी नसीहत, राजनीति को चुनाव के समय के लिए छोड़ देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील राहुल मेहरा से भी कहा, हम चाहते हैं कि आप सर्वोच्च अथॉरिटी को संदेश दें कि इस मानवीय संकट में केंद्र सरकार के साथ सहयोग की भावना होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ से दिल्ली सरकार से कहा, हम संकट के समय राजनीतिक कलह नहीं चाहते हैं। राजनीति, चुनाव के समय होती है। सहयोग की भावना होनी चाहिए। जीवन बचाना प्राथमिकता है।