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यूएपीए मामला: अपील लंबित होने के बावजूद राजस्थान हाईकोर्ट से पैरोल दिए जाने से सुप्रीम कोर्ट नाराज
Sun, 13 Jun 2021 04:10 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 13 Jun 2021 04:10 AM IST
सार
- जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह टिप्पणी दोषी अरुण कुमार जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। यूएपीए मामले में दोषी ठहराया गया अरुण फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में यूएपीए मामले में दोषी ठहराये गए व्यक्ति की अपील लंबित होने के बावजूद राजस्थान हाईकोर्ट से उसे पैरोल दिए जाने पर शीर्ष अदालत ने शनिवार को नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, हाईकोर्ट ने पैरोल देकर गलती की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दोषी को पैरोल देकर हाईकोर्ट ने की गलती
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह टिप्पणी दोषी अरुण कुमार जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। यूएपीए मामले में दोषी ठहराया गया अरुण फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है। अरुण ने पिता के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए तीन महीने के लिए जमानत की गुहार लगाई थी।
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अरुण ने जमानत का यह आवेदन अक्तूबर, 2018 में हाईकोर्ट द्वारा उसे दोषी ठहराए गए फैसले के खिलाफ लंबित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस शाह ने कहा, जब एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तो हाईकोर्ट ने आपको पैरोल कैसे दे दिया। हमें इस बात पर घोर आपत्ति है।
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आपको यहां आना चाहिए था। पीठ ने जमानत देने से इनकार करते हुए दोषी को पैरोल के लिए हाईकोर्ट जाने को लेकर कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने कहा, जब अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तो आखिर पैरोल के लिए हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। पीठ ने यह भी पाया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में भी दोषी को अंतरिम जमानत दी थी।
जमानत अवधि पूरी होने के बाद उसने समर्पण किया। उसे पता था कि उसकी जमानत की अवधि और नहीं बढ़ सकती इसलिए उसने पैरोल के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से उसे पैरोल मिल गई।