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अलगाववादियों को फंड बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट भी सहमत

Fri, 09 Sep 2016 05:51 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 09 Sep 2016 05:51 AM IST
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Supreme Court also agrees to close the fund to separatists

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं और धन को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देने के विचार से वह भी सहमत है और उसे भी यही लगता है कि ऐसा होना चाहिए। इस संबंध में दायर की गई जनहित याचिका पर शीर्ष अदालत ने अगले हफ्ते सुनवाई का वक्त दिया है। याचिका में कहा गया कि इस फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए हो रहा है लिहाजा इस फंड को तत्काल बंद किया जाए।

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न्यायमूर्ति अनिल आर दवे और एल नागेश्वर की पीठ ने इस जनहित याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई करने का निर्णय लेते हुए कहा कि हम सब भी कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं और यहां बैठे सभी व्यक्ति भी ऐसा ही महसूस करते हैं। जनहित याचिका वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में अलगाववादियों को सरकारी धन के कथित आवंटन की भी सीबीआई जांच की मांग की गई है। 
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वकील ने अपनी याचिका में कहा है कि कई मीडिया खबरों के मुताबिक अलगाववादी नेताओं को जाने-आने, रहने सहित और अन्य कई उद्देश्यों के सरकारी फंड दिए जाते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस मसले पर तत्काल दखल देना चाहिए। यह धन केंद्र सरकार के खजाने से दिया जाता है और वह भी बिना किसी वैध अनुमति और अथॉरिटी के। याचिका में गुहार की गई है कि इस तरह के फंड को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देते हुए हमेशा के लिए इसे बंद कर दिया जाना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों को फंड देने से रोकना होगा, जो देशहित के खिलाफ काम करते हैं।

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'पांच वर्षों में अलगाववादियों पर 356 करोड़ रुपए खर्च किए गए'

Supreme Court also agrees to close the fund to separatists

याचिका में कहा गया है कि पिछले करीब पांच सालों में इन अलगाववादियों की सुरक्षा, उनके घूमने और रहने पर करीब 356 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्हें आलीशान होटलों में रखने के मद में सरकार ने 21 करोड़ रुपये खर्च किए। उकी यात्रा पर खर्च होने वाले ईंधन पर 26.43 करोड़ रुपये खर्च हुए और इन सभी यात्राओं में भारत विरोधी गतिविधियों हुई।

याचिका में कहा गया है कि यह खर्च आम लोगों से वसूले जाने वाले टैक्स से हो रहा है और वह भी बिना संसद को जानकारी दिए। सीएजी ने भी इसे लेकर कोई ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं की कि आखिरकार इस फंड कहां इस्तेमाल होता है क्योंकि यह खर्च देश के खिलाफ विद्रोह करने के लिए हो रहा है।

याचिका में यह भी गुहार की गई है कि जो लोग इस तरह का गैरकानूनी फंड जारी कर रहे रहे हैं, सीबीआई को उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर और सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है।

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