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Supreme Court: खनन लीज पट्टा आवंटन मामले में हेमंत सोरेन को राहत, SC ने उच्च न्यायालय के आदेश को किया रद्द

Mon, 07 Nov 2022 07:00 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 07 Nov 2022 07:00 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने शेल कंपनियों में निवेश और खनन पट्टे में अनियमितता को लेकर सोरेन के खिलाफ दाखिल की गईं जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

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Supreme Court allows appeal of Hemant Soren against the Jharkhand HC connection with shell companies
हेमंत सोरेन - फोटो : social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने शेल कंपनियों में निवेश और खनन पट्टे में अनियमितता को लेकर सोरेन के खिलाफ दाखिल की गईं जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसमें उसने इन याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना था। 

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बता दें, सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ गलत तरीके से खनन लीज पट्टा आवंटन करने और उनके करीबियों द्वारा शेल कंपनियों में निवेश का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका की वैधता को झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, झारखंड उच्च न्यायालय ने इस याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना था। इसके बाद सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 17 अगस्त को इस मामले में शीर्ष अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 
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इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ए राय ने बताया कि झारखंड सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी व सीबीआई जांच की मांग को लेकर दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। एक जनहित याचिका आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में है, वहीं दूसरी याचिका अवैध खनन से संबंधित है। उन्होंने कहा,  वर्तमान में सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई भी जांच लंबित नहीं है। 
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इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। सोरेन ने कहा कि जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की स्थिरता को स्वीकार करने वाले उच्च न्यायालय के 3 जून के आदेश को खारिज करने के फैसले ने उनके लिए काम करने के संकल्प को मजबूत किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कथित अवैध खनन मामले में सोरेन के खिलाफ जांच के लिए उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका विचारणीय नहीं है।

सोरेन ने कहा कि मुझे कानून के शासन और देश के न्यायिक संस्थानों में दृढ़ विश्वास और विश्वास है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दावा किया कि शीर्ष अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोरेन और उनकी सरकार को एक साजिश के तहत भाजपा द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।


इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने 17 अगस्त को झारखंड सरकार और सोरेन की अलग-अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने इससे पहले उच्च न्यायालय को खनन पट्टा मामले में सोरेन के खिलाफ जांच की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर कार्यवाही से रोक दिया था।

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