PMLA Act: ED की शक्तियों के फैसले से जुड़ी पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार, जानें मामला
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट 25 अगस्त को सुनवाई करेगी। सीजेअई एनवी रमण, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने मामले को सुनने पर सहमति जताई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों के फैसले से जुड़ी पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट 25 अगस्त को सुनवाई करेगी। सीजेअई एनवी रमण, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने मामले को सुनने पर सहमति जताई। कार्ति ने सुप्रीम कोर्ट में ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने के 27 जुलाई के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए याचिका दाखिल की थी।
इससे पहले PMLA पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से दर्ज केस में फंसे लोगों को झटका देते हुए कोर्ट ने पीएमएलए कानून के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 2018 में कानून में किए गए संशोधन सही हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सभी अधिकारों को बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी, रेड, समन, बयान समेत PMLA एक्ट में ED को दिए गए सभी अधिकारों को सही ठहराया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को एफआईआर के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। ईसीआईआर की कॉपी आरोपी को देना जरूरी नहीं है। गिरफ्तारी के दौरान कारणों का खुलासा करना ही काफी है। कोर्ट ने कहा था कि ईडी के सामने दिया गया बयान ही सबूत है।
100 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई थीं
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में पीएमएलए के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए 100 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई थीं। इसमें ईडी की शक्तियों, गिरफ्तारी के अधिकार, गवाहों को समन व संपत्ति जब्त करने के तरीके और जमानत प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाएं कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम, एनसीपी नेता अनिल देशमुख व अन्य की ओर से दायर की गई थीं।
संविधान पीठ में लंबित 25 मामले 29 से होंगे सूचीबद्ध
- सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित के सीजेआई पद संभालने के बाद 29 अगस्त से संविधान पीठ के लंबित मामलों पर सुनवाई शुरू होगी। शीर्ष अदालत ने बुधवार को इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ के 25 मामले 29 अगस्त से सूचीबद्ध किये जाएंगे। सीजेआई एनवी रमण 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और जस्टिस यूयू ललित 27 अगस्त को पद संभालेंगे। 28 को रविवार है और बतौर सीजेआई यूयू ललित के लिए 29 अगस्त पहला कार्य दिवस होगा।
- संविधान पीठ के समक्ष लंबित अहम मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण वाले 103 संशोधन अधिनियम 2019 को चुनौती वाली याचिका, व्हाट्सएप प्राइवेसी नीति को चुनौती देने वाली याचिका शामिल है। इनके अलावा संसद सदस्य या विधायक द्वारा सदन में भाषण देने या वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर आपराधिक अभियोजन से छूट का दाव करने का मुद्दा भी शामिल है। वहीं संविधान पीठ पंजाब में सिखों को अल्पसंख्यक दर्जा देने और आंध्र प्रदेश विधानसभा में सभी मुस्लिम सदस्यों को पिछड़ी जातियों का घोषित किये जाने की वैधता पर भी विचार करेगी।
सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति का देश में कोई मूल्य नहीं : सीजेआई
वहीं, भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमण ने बुधवार को कहा कि जो व्यक्ति देश में सेवानिृवत्त होता है या सेवानिवृत्त होने वाला है, उसका इस देश में कोई मूल्य नहीं है। 26 अगस्त को वह सीजेआई के पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सीजेआई की यह टिप्पणी चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त वादों से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पीठ में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सी टी रविकुमार भी मौजूद थे।
याचिकाकर्ता अश्विन उपाध्याय के वकील ने सुझाव दिया कि इस पहलू पर गठित की जाने वाली समिति का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज होना चाहिए। इस पर सीजेआई रमण ने कहा, सेवानिवृत्त व्यक्ति की देश में कोई कीमत नहीं है। यही दिक्कत है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह संबंधित व्यक्ति का व्यक्तित्व है, जिससे फर्क पड़ता है।