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SC: कावेरी जल विवाद पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार; प्रदीप शर्मा की जमानत पर फैसला सुरक्षित

Mon, 21 Aug 2023 11:14 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 21 Aug 2023 11:14 AM IST
सार

तमिलनाडु सरकार पानी छोड़ने पर नए निर्देश चाहती है। इस मामले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट एक पीठ गठित करने पर सहमत हो गया है।

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Supreme Court agrees to constitute a bench to hear the Cauvery River water-sharing dispute, SC NEWS & UPDATE
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट कावेरी नदी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराने विवाद की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेगा। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तत्काल सुनवाई के लिए मामले का उल्लेख किया था। तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्य ने अगस्त महीने के लिए पानी छोड़ने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया है, जिसका आदेश कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने दिया है। रोहतगी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करना होगा। इस पर सीजेआई ने कहा, मैं एक पीठ का गठन करूंगा।

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धोखा देने का आरोप
तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जद (एस) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर राजनीति की खातिर और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अपने ‘इंडिया’ गठबंधन को बचाने के लिए राज्य के लोगों और उसके किसानों को 'धोखा' देने का आरोप लगाया था।

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कावेरी नदी के पानी को लेकर है विवाद
इससे पहले, बीते सोमवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम अदालत के फैसले की इज्जत करते हैं और तमिलनाडु के लोगों को जल्दबाजी में सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करना चाहिए। हमें साथ मिलकर दोनों राज्यों के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर काम करना होगा।

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गौरतलब है, कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक से होता है और यह तमिलनाडु, पुडुचेरी से गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। कावेरी नदी बेसिन 81,155 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसका 34,273 वर्ग किलोमीटर इलाका कर्नाटक में पड़ता है। 2866 वर्ग किलोमीटर केरल और बचा हुआ 44,016 वर्ग किलोमीटर तमिलनाडु और पुडुचेरी में है। 

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

एंटीलिया बम मामला: प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। एंटीलिया बम धमकी मामला और कारोबारी मनसुख हिरन के सिलसिले में शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के पास 25 फरवरी, 2021 को विस्फोटकों से भरा एक वाहन (एसयूवी) मिला था। वाहन के मालिक व्यवसायी हिरन को पांच मार्च, 2021 को पड़ोसी ठाणे में एक खाड़ी जल क्षेत्र में मृत पाया गया था। उनके वकील का दावा है कि उनके खिलाफ एकमात्र आरोप यह है कि उन्होंने हिरन को खत्म करने में अपने पूर्व सहयोगी सचिन वाजे की मदद की थी।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता पर व्यापक अध्ययन के लिए सुप्रीम कोर्ट बनाएगा विशेषज्ञ समिति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश में हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता पर ‘संपूर्ण और व्यापक’ अध्ययन को बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए इसके लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने पर विचार किया। वहन क्षमता वह अधिकतम जनसंख्या आकार है जिसे कोई पारिस्थितिकी तंत्र खराब हुए बिना बनाए रख सकता है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए वहन क्षमता और मास्टर प्लान के आकलन की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता के वकील अशोक कुमार राघव ने पीठ को बताया कि विशेषज्ञ संस्थानों के व्यापक अध्ययन की जरूरत है क्योंकि हिमालय क्षेत्र में लगभग हर दिन तबाही देखी जा रही है। इस पर पीठ ने कहा, हम इनमें से तीन या चार संस्थानों को नियुक्त कर सकते हैं जो अपने प्रतिनिधियों को नामांकित करेंगे और हम उनसे हिमालय क्षेत्र के भीतर वहन क्षमता पर एक पूर्ण और व्यापक अध्ययन करने के लिए कह सकते हैं। पीठ ने राघव से एक प्रस्ताव में यह बताने को कहा कि वे कौन से विशेषज्ञ संस्थान हैं जिन्हें इस समिति में होना चाहिए और समिति के लिए संदर्भ की व्यापक शर्तें क्या होनी चाहिए। पीठ ने यह प्रस्ताव केंद्र की ओर से पेश हो रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी को पहले ही देने को कहा।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के एक आदेश का हवाला देते हुए, भाटी ने पीठ को बताया कि इस तरह का एक खाका तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखा है और अब उन्हें दिखाना होगा कि उन्होंने इस बारे में क्या किया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ विशेषज्ञ संस्थानों का हवाला भी दिया। इस पर पीठ ने कहा, इन संस्थानों को शामिल करते हुए एक व्यापक अध्ययन होने दें और उन्हें तीन-चार महीने का समय दें और उन्हें कुछ महत्वपूर्ण वहन क्षमता वाले उपकरण व संपूर्ण हिमालय क्षेत्र के लिए टेम्पलेट लेकर आने दें। भाटी ने कहा कि याचिका में 13 राज्यों समेत 16 वादियों को शामिल किया गया है। इस पर पीठ ने कहा, हम उनसे (राज्यों से) चार या आठ सप्ताह के भीतर आपके टेम्पलेट का जवाब देने के लिए कहेंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

शौचालयों की उपलब्धता पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पुरुषों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए न्यायिक परिसरों में शौचालयों की उपलब्धता पर अब तक हलफनामा दाखिल नहीं करने वाले उच्च न्यायालयों को दो हफ्तों के अंदर सकारात्मक ढंग से ऐसा करने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 25 में से 23 उच्च न्यायालयों ने अपना-अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल किया है। शेष दो उच्च न्यायालयों को दो हफ्तों के अंदर अपना जवाब दाखिल करना चाहिए, जिसमें नाकाम रहने को शीर्ष न्यायालय गंभीरता से लेगा।

सरकारी अधिकारियों की अदालतों में पेशी के लिए बनेंगे दिशानिर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह सरकार से जुड़े मामलों में सरकारी अधिकारियों को तलब करने को लेकर देशभर की अदालतों के लिए दिशानिर्देश बनाएगा। पीठ ने सोमवार को कहा कि लंबित मामलों और जिन मामलों में पहले ही फैसला सुनाया जा चुका है (जिसमें न्यायालय की अवमानना का एक तत्व हो), उनमें सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग को लेकर अलग मानक होने चाहिए। पीठ ने कहा कि हम सरकारी अधिकारियों को तलब करने के लिए कुछ दिशानिर्देश तय करेंगे।

अनुच्छेद 370 हटाने को वैध घोषित करने की अर्जी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 रद्द करने और अनुच्छेद 35 ए को हटाने के केंद्र के फैसले को वैध घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, यह किस तरह की याचिका है? आपके मुवक्किल को किसने खड़ा किया है? सीजेआई ने कहा, केंद्र सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की सांविधानिक वैधता के संबंध में यह अदालत घोषणा नहीं कर सकती। सांविधानिक वैधता का प्रश्न इस अदालत के समक्ष लंबित है। 

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