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Supreme Court: बहू को दहेज के लिए परेशान किए जाने की बात हवा से भी तेज फैलती है, अदालत ने सास को किया बरी

Sat, 30 Aug 2025 07:39 AM IST
दीपक कुमार शर्मा राजीव सिन्हा
राजीव सिन्हा Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 30 Aug 2025 07:39 AM IST
सार

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता आरोपी महिला भगवती देवी की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष के रूप में पेश पड़ोसी की गवाही को खारिज कर दिया था।
 

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Supreme Court acquitted woman accused of cruelty to her daughter-in-law on testimony of neighbour
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बहू के साथ क्रूरता करने की आरोपी महिला को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों की ओर से दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बात हवा से भी तेज फैलती हैं। बहू ने 2001 में आत्महत्या कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसी की गवाही पर आरोपी महिला को बरी कर दिया।

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जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता आरोपी महिला भगवती देवी की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष के रूप में पेश पड़ोसी की गवाही को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि पड़ोसी दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य नहीं बता सकती क्योंकि यह घटना घर की चारदीवारी के अंदर हुई। महिला को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत इस आधार पर दोषी ठहराया गया था कि उनकी मृत बहू ने अपने परिवार को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात कही थी। भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए विवाहित महिला के प्रति उसके पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से की गई क्रूरता के अपराध से संबंधित है।
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पड़ोसी की गवाही बनी राहत का आधार
पीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्ष को गलत बताते हुए कहा कि विशेष रूप से ऐसे मामलों में सास-ससुर की ओर से बहू को दहेज के लिए परेशान किए जाने की बात हवा से भी तेजी से फैलती है। पीठ ने कहा कि इस मामले में ऐसे तथ्य स्पष्ट रूप से अनुपस्थित होने के कारण उसे इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि धारा 498-ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और उसे दी गई सजा को बरकरार नहीं रखा जा सकता। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता की पड़ोसी ने गवाही दी कि उसने कभी दहेज की कोई मांग नहीं की थी। पड़ोसी ने यह भी गवाही दी कि मृतका ने उसे बताया था कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। पीठ ने महसूस किया कि वह न तो अपीलकर्ता की रिश्तेदार थी और न ही उस समुदाय से संबंधित थी जिससे अपीलकर्ता संबंधित है, इसलिए यह संकेत मिलता है कि अपीलकर्ता के पक्ष में गवाही देने में उसकी कोई रुचि नहीं थी।

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