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Supreme Court: जस्टिस ओका ने रिटायर होने से पहले कहा- किसी अदालत को 'निचली' कहना सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ

Sat, 24 May 2025 03:02 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 24 May 2025 03:02 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने जिला स्तरीय अदालतों या वरीयता क्रम में शीर्ष अदालत से पहले आने वाले कोर्ट के लिए इस्तेमाल होने वाली शब्दावली पर अहम टिप्पणी की है। हत्या के दो दोषियों को 44 साल बाद बरी करने का आदेश पारित कर उच्चतम न्यायालय की इस खंडपीठ ने कहा, किसी भी अदालत को निचली कहा जाना सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। जानिए क्या है वर्ष 1981 के इस मुकदमे से जुड़ा पूरा मामला

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Supreme Court 1981 Murder case Justice abhay oka bench lower court nomenclature against constitutional values
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी अदालत को निचली अदालत कहना सांविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने हत्या के 1981 के एक मामले में दो दोषियों को बरी करते हुए यह बात कही। पीठ ने कहा, फैसला सुनाने से पहले हम 8 फरवरी, 2024 के आदेश में दिए गए निर्देश को दोहराते हैं कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड को 'निचली अदालत के रिकॉर्ड' के रूप में संदर्भित नहीं किया जाना चाहिए।

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कोर्ट को निचली अदालत बताना हमारे संविधान के मूल्यों के खिलाफ
पीठ के लिए फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति ओका ने कहा, किसी भी कोर्ट को निचली अदालत बताना हमारे संविधान के मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने आदेश को प्रभावी बनाने के लिए पिछले साल फरवरी में एक परिपत्र जारी किया था। न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालयों को निर्देश का संज्ञान लेना चाहिए और उसी के अनुसार कार्य करना चाहिए।
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अभियोजन पक्ष ने निष्पक्ष जांच नहीं की
पीठ का फैसला दो दोषियों की अपील पर आया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अक्तूबर, 2018 के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से उनकी दोषसिद्धि और जेल की अवधि को बरकरार रखा था। शीर्ष अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने निष्पक्ष जांच नहीं की क्योंकि उसने अभियोजन पक्ष के कुछ गवाहों के हलफनामों के रूप में महत्वपूर्ण सामग्री को दबा दिया।

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यह भी दिलचस्प है कि सांविधानिक मूल्यों को रेखांकित करने वाले इस फैसले को लिखने वाले जस्टिस ओका शुक्रवार को ही रिटायर भी हुए। अपने विदाई समारोह में न्यायमूर्ति अभय एस. ओका ने सुप्रीम कोर्ट को एक "मुख्य न्यायाधीश केंद्रित अदालत" करार देते हुए इसकी छवि को बदलने की जरूरत पर बल दिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने कहा, जब देशभर से आए 34 न्यायाधीश इस सर्वोच्च अदालत का हिस्सा हैं, तो उसका प्रशासनिक स्वरूप अधिक सहभागी और विकेंद्रीकृत होना चाहिए।

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