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सुपरटेक ट्विट टावर: 711 में से 652 घर खरीदारों को वापस मिली राशि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हितों की करेंगे रक्षा
Mon, 04 Apr 2022 08:05 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 04 Apr 2022 08:05 PM IST
सार
ट्विन टावरों के कुल 711 घर खरीदारों में से 652 के दावे का कंपनी ने निपटारा कर दिया है। 59 घर खरीदारों को अभी भी राशि वापस की जानी है।
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सुपरटेक ट्विन टावर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह रियल एस्टेट डेवलपर सुपरटेक लिमिटेड की एमराल्ड कोर्ट परियोजना के 40 मंजिला जुड़वां टावरों के घर खरीदारों के हितों की रक्षा करेगा, जिसे अब एनसीएलटी ने दिवालिया घोषित कर दिया है। अदालत ने उन्हें 15 अप्रैल तक भुगतान की वापसी के अपने दावे दाखिल करने का निर्देश दिया है। रियल्टी फर्म सुपरटेक लिमिटेड ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि वह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा लगभग 432 करोड़ रुपये का भुगतान न करने के लिए दायर याचिका पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी।
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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन और न्याय मित्र गौरव अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस गणेश की दलीलों पर गौर किया कि ट्विन टावरों के कुल 711 घर खरीदारों में से 652 के दावे का कंपनी ने निपटारा कर दिया है। 59 घर खरीदारों को अभी भी राशि वापस की जानी है। एमिकस क्यूरी ने बता कि बकाया राशि लगभग 14.96 करोड़ रुपये होगी।
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शीर्ष अदालत ने अग्रवाल द्वारा दायर एक नोट को रिकॉर्ड में लिया जिसमें कहा गया है कि एनसीएलटी ने 25 मार्च, 2022 को एक आदेश पारित किया है, जिसके द्वारा सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ एक कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की गई है और आईआरपी हितेश गोयल को नियुक्त किया गया है।
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अग्रवाल ने अपने नोट में कहा कि बेंच इस बात पर विचार कर सकती है कि क्या शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार ट्विन टावरों के शेष घर खरीदारों का भुगतान समाधान प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए या कंपनी के पास उपलब्ध फंड द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भुगतान को समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाता है, तो क्या यह समाधान योजना में एक अलग श्रेणी होगी ताकि घर खरीदारों को सफल समाधान आवेदक से ब्याज के साथ धन वापसी हो सके।