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Consensual Relationship: अविवाहित महिला 23 सप्ताह की गर्भवती, सुप्रीम कोर्ट से मांगी गर्भपात की इजाजत

Tue, 19 Jul 2022 02:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 19 Jul 2022 02:05 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने उक्त महिला को गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने पिछले शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह भ्रूण हत्या के बराबर है।

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Supeme Court to consider listing womans plea seeking termination of 23-week foetus
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

एक अविवाहित महिला ने अपने पेट में पल रहे 23 सप्ताह के भ्रूण को गिराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की इजाजत मांगी है। शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को उसकी याचिका पर विचार करने की सहमति दे दी। यह महिला सहमति से बनाए गए संबंध के चलते गर्भवती हो गई है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने उक्त महिला को गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने पिछले शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह भ्रूण हत्या के बराबर है। सीजेआई एन वी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ को महिला के वकील ने बताया कि याचिका पर मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए तत्काल सुनवाई की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा, 'अभी हमें कागजात दिए गए  हैं, हम देखते हैं।' 
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16 जुलाई को जारी आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने अविवाहित महिला को 23 सप्ताह के भ्रूण को गर्भपात करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट कहा था कि गर्भपात कानून के तहत सहमति से संबंध की दशा में 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं है। 
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भेदभाव की दलील पर हाईकोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब
हाईकोर्ट ने इजाजत नहीं मांगी, लेकिन महिला की दलील पर केंद्र से जवाब मांगा है। महिला ने कहा है कि अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक गर्भावस्था के चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है।

पार्टनर ने शादी से इनकार कर दिया था
18 जुलाई को 24 सप्ताह की गर्भवाती हो गई
याचिकाकर्ता 25 वर्षीय महिला है। वह 18 जुलाई को गर्भधारण के 24 सप्ताह पूरे कर चुकी है। उसने अदालत को बताया था कि उसके साथी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था, जबकि उन्होंने सहमति से संबंध बनाए थे। 


पीड़िता ने कहा-अविवाहित मां सामाजिक कलंक होगी
गर्भवती अविवाहिता ने जोर देकर कहा था कि विवाह के बगैर बच्चे को जन्म देने से उसे मनोवैज्ञानिक पीड़ा होगी, इसके साथ-साथ यह सामाजिक कलंक भी होगा। वह मानसिक रूप से मां बनने के लिए तैयार नहीं थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर विचार करते हुए कहा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए कानून से परे   नहीं जा सकती। इसके बाद हाईकोर्ट ने 15 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता, जो एक अविवाहित महिला है और वह सहमति से संबंध के चलते गर्भवती हुई है। गर्भपात की इजाजत का यह मामला मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रूल्स 2003 के दायरे में नहीं आता है। 

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