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चीन से तनाव के बीच रूस से जल्द आ सकते हैं सुखोई-30 लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और युद्धपोत

Tue, 23 Jun 2020 08:08 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Tue, 23 Jun 2020 08:08 AM IST
सार

  • तीन दिवसीय दौरे पर मॉस्को गए हैं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
  • रूस से रक्षा उपकरणों की जल्द आपूर्ति करने की मांग

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Sukhoi-30 fighter aircraft, T-90 tanks and warships may arrive from Russia soon amid tension from China
सुखोई-30 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सीमा पर चीन से तनाव के बीच रूस जल्द ही भारत को सुखोई-30, मिग-29 लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक, युद्धपोत, पनडुब्बी समेत कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की आपूर्ति कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, रूस के तीन दिवसीय दौरे पर सोमवार को रवाना हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इन रक्षा उपकरणों की तत्काल आपूर्ति किए जाने की मांग करेंगे।

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पहले इन उपकरणों की आपूर्ति समुद्री रास्ते से होनी थी, मगर कोरोना महामारी के चलते यह आपूर्ति अटकी पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, भारत चाहता है कि रूस अब सुखोई-30, टी-90 टैंक और युद्धक कलपुर्जों की आपूर्ति समुद्र के बजाय हवाई रास्ते से करे, ताकि मौजूदा हालात को देखते हुए सेना को जल्द से जल्द उन्नत साजोसामान से लैस किया जा सके।
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माना जा रहा है कि राजनाथ के दौरे के वक्त दोनों देशों में रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हो सकती है। वह रूसी विदेश मंत्री को सीमा पर तनाव की जानकारी भी दे सकते हैं। इसके अलावा राजनाथ एस-400 मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए रूसी सरकार पर दबाव डाल सकते हैं।
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भारत पिछले साल ही इसके लिए रूस को 5.4 बिलियन डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) का भुगतान कर चुका है। वहीं, रवाना होने से पहले राजनाथ ने ट्वीट कर कहा, यात्रा के दौरान भारत-रूस के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर बातचीत होगी। मैं मॉस्को में 75वीं विजय परेड दिवस में भी शामिल होऊंगा। यह परेड 24 जून को होनी है। राजनाथ सिंह के साथ रक्षा सचिव अजय कुमार भी गए हैं। 

तीनों सेनाओं के लिए होनी है आपूर्ति
सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना के लिए सुखोई-30 एमकेआई और मिग-29, वहीं भारतीय नौसेना के लिए मिग-29 के और किलो क्लास की पनडुब्बियां और थल सेना के लिए टी-90 युद्धक टैंकों की आपूर्ति होनी है। अभी रक्षा प्रणाली के अगले साल के अंत तक भारत आने की संभावना है। वहीं, भुगतान में देरी की वजह से कुछ कंपनियों ने रक्षा उपकरणों की तारीख को आगे बढ़ा दिया था। इस पर भी रक्षामंत्री अपने दौरे के वक्त चर्चा करेंगे।

एस-400 प्रणाली: तीन दिशाओं में मिसाइलों से मचा सकती है तबाही

  • रूस द्वारा विकसित यह मिसाइल प्रणाली जमीन से हवा में मार करने में सक्षम 
  • दुश्मन की परमाणु या क्रूज मिसाइलों को 400 किमी दूर से ध्वस्त करने में माहिर
  • तीन प्रमुख उपकरण मिसाइल लॉन्चर, शक्तिशाली रडार और कमांड सेंटर से लैस
  • रक्षा प्रणाली में लगा हुआ रडार 600 किमी की दूरी तक लक्ष्य देखने में सिद्धहस्त
  • एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइलें दागने की अचूक मारक क्षमता
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