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Sugarcane Price: किसानों ने कहा- महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ें गन्ने के दाम, सही समय पर भुगतान कराने की मांग

Fri, 05 Aug 2022 08:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 05 Aug 2022 08:58 PM IST
सार

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कन्वेनर वीएम सिंह ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि चीनी मिलों के द्वारा लगातार घाटा होने की बात कहकर सरकार से तरह-तरह का लाभ लिया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि इस तथाकथित घाटे के बावजूद चीनी मिल मालिकों की मिलों की संख्या  लगातार बढ़ती जा रही हैं, जबकि किसानों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है।

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Sugarcane Price Farmers said sugarcane prices should not increase according to inflation timely payment demand
Sugarcane Price - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य 290 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 305 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया है। केंद्र ने इस मूल्य तक पहुंचने के लिए गन्ने का उत्पादन मूल्य 162 रूपये प्रति क्विंटल बताया है, जिस पर 88 प्रतिशत ज्यादा मूल्य देते हुए नया मूल्य निर्धारित किया गया है। किसानों का कहना है कि गन्ना उत्पादन की लागत इससे कहीं ज्यादा है और वर्तमान में यह 304 रूपये के आसपास बैठती है। इस वास्तविक उत्पादन मूल्य के हिसाब से देखें, तो  केंद्र के द्वारा की गई मूल्य बढ़ोतरी केवल छलावा है और इससे गन्ना उत्पादक किसानों का कोई भला नहीं होगा। किसानों ने सरकार से केंद्र में गन्ना विभाग बनाने की मांग की है जिससे गन्ना किसानों की समस्याओं का उचित समाधान किया जा सके।  

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गन्ना किसानों की बड़ी समस्या समय से भुगतान न होना भी है जिससे आवश्यक खर्चों के भुगतान के  लिए उन्हें कर्ज लेकर अपना काम चलाना पड़ता है। गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 15 दिन की समयावधि तय की गई थी, समय बीत जाने के बाद उस पर ब्याज देने की बात भी कही गई थी, लेकिन किसानों का आरोप है कि इसके बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है।   
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कन्वेनर वीएम सिंह ने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि चीनी मिलों के द्वारा लगातार घाटा होने की बात कहकर सरकार से तरह-तरह का लाभ लिया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि इस तथाकथित घाटे के बावजूद चीनी मिल मालिकों की मिलों की संख्या  लगातार बढ़ती जा रही हैं, जबकि किसानों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। 
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उन्होंने कहा कि चीनी मिलें चीनी उत्पादन पर घाटा बताती हैं, जबकि इसके साथ अन्य सहउत्पादों (मोलासिस, बगास और प्रेस मड) को बेचकर वे भारी मुनाफा कमाती हैं जिसका जिक्र भी नहीं किया जाता। उन्होंने केंद्र से इस विसंगति को दूर कर गन्ना किसानों की समस्या दूर करने की मांग की है।    


2021-22 में 100 एलएमटी चीनी का निर्यात किया गया
इस बीच उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से भी बयान जारी किया गया। इसके मुताबिक, 2021-22 में 100 एलएमटी चीनी का निर्यात किया गया और 35 एलएमटी चीनी को इथेनॉल में बदल दिया गया। अतिरिक्त 12 एलएमटी निर्यात से चीनी मिलों को 3600 करोड़ रुपये किसानों का गन्ना मूल्य बकाया चुकाने में मदद मिली। वहीं, 112 लाख मीट्रिक टन तक के निर्यात के बाद भी उचित मूल्य पर देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता होगी। भारत अब चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

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