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UN: 'देश नियंत्रण से बाहर जा रहा, तत्काल युद्धविराम जरूरी', सूडान में चल रहे युद्ध पर बोले यूएन के प्रमुख
Tue, 04 Nov 2025 06:17 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 04 Nov 2025 06:17 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सूडान में चल रहे युद्ध को नियंत्रण से बाहर बताते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने कहा कि दरफूर के एल-फाशर शहर पर पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स के कब्जे के बाद हालात बेहद गंभीर हैं।
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एंटोनियो गुटेरेस, यूएन महासचिव
- फोटो : ANI
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि सूडान में चल रहा युद्ध अब नियंत्रण से बाहर हो चुका है। दुबई में आयोजित एक यूएन सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि दरफूर क्षेत्र के एल-फाशर शहर पर पैरामिलिट्री फोर्स के कब्जे के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। गुटेरेस ने कहा कि यह संघर्ष दुनिया के सबसे भयानक मानवीय संकटों में बदल गया है और तत्काल युद्धविराम बेहद जरूरी है।
गुटेरेस ने बताया कि एल-फाशर में सैकड़ों हजार नागरिक फंसे हुए हैं और वे भूख, बीमारी और हिंसा के कारण मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरें लगातार मिल रही हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, रैपिड सपोर्ट फोर्स के शहर में प्रवेश करने के बाद बड़े पैमाने पर हत्याएं और हिंसा की गई हैं।
नरसंहार और अत्याचार के आरोप
यूएन अधिकारियों ने बताया कि एल-फाशर पर कब्जे के बाद आरएसएफ ने अस्पतालों में 450 से ज्यादा लोगों की हत्या की और नागरिकों पर जातीय आधार पर हमले किए। महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि आरएसएफ ने इन आरोपों को नकार दिया है, लेकिन भागे हुए लोगों की गवाही, ऑनलाइन वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरें उस क्षेत्र में हुए नरसंहार की भयावह सच्चाई को उजागर करती हैं।
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ये भी पढ़ें- अमेरिकी इतिहास के सबसे ताकतवर पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी का निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार
सूचनाओं का संकट और भूख की मार
एल-फाशर शहर पिछले 18 महीनों से आरएसएफ की घेराबंदी में था। इस दौरान खाद्य आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की कमी से हजारों लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए। बीते सप्ताह इस पैरामिलिट्री समूह ने आखिरकार पूरे शहर पर कब्जा कर लिया। खराब संचार व्यवस्था के कारण हिंसा का पूरा पैमाना सामने नहीं आ पाया है।
युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय अपील
गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सूडान में हथियारों की आपूर्ति रोकी जाए और अपराधों के लिए जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि युद्ध ने देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है, जहां अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। कई क्षेत्रों में भुखमरी फैल चुकी है। उन्होंने कहा कि अब वक्त है इस खूनखराबे को रोकने का क्योंकि सूडान को शांति चाहिए।
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गुटेरेस ने बताया कि एल-फाशर में सैकड़ों हजार नागरिक फंसे हुए हैं और वे भूख, बीमारी और हिंसा के कारण मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरें लगातार मिल रही हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, रैपिड सपोर्ट फोर्स के शहर में प्रवेश करने के बाद बड़े पैमाने पर हत्याएं और हिंसा की गई हैं।
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नरसंहार और अत्याचार के आरोप
यूएन अधिकारियों ने बताया कि एल-फाशर पर कब्जे के बाद आरएसएफ ने अस्पतालों में 450 से ज्यादा लोगों की हत्या की और नागरिकों पर जातीय आधार पर हमले किए। महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि आरएसएफ ने इन आरोपों को नकार दिया है, लेकिन भागे हुए लोगों की गवाही, ऑनलाइन वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरें उस क्षेत्र में हुए नरसंहार की भयावह सच्चाई को उजागर करती हैं।
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सूचनाओं का संकट और भूख की मार
एल-फाशर शहर पिछले 18 महीनों से आरएसएफ की घेराबंदी में था। इस दौरान खाद्य आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की कमी से हजारों लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए। बीते सप्ताह इस पैरामिलिट्री समूह ने आखिरकार पूरे शहर पर कब्जा कर लिया। खराब संचार व्यवस्था के कारण हिंसा का पूरा पैमाना सामने नहीं आ पाया है।
युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय अपील
गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सूडान में हथियारों की आपूर्ति रोकी जाए और अपराधों के लिए जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि युद्ध ने देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है, जहां अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। कई क्षेत्रों में भुखमरी फैल चुकी है। उन्होंने कहा कि अब वक्त है इस खूनखराबे को रोकने का क्योंकि सूडान को शांति चाहिए।
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