देश के बाजारों में मिल रही घटिया और नकली दवाएं
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हालांकि विशेषज्ञों का कहना है इतने बड़े सर्वे में यह फीसदी ज्यादा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मंत्रालय दवाओं की गुणवत्ता के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहता है, इसलिए ऐसे फर्म और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
'सर्वे की पारदर्शिता पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते'
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि नोएडा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलॉजिकल (एनआईबी) की ओर से कराए गए सर्वे में देश के सभी 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के 654 जिलों से दवाओं के नमूने लिए गए। नमूनों की जांच केन्द्रीय और राज्यों के प्रयोगशालाओं में किए गए। जांच के बाद पाया गया कि 47,012 नमूनों में 13 नमूने नकली पाए गए जबकि 1850 नमूनों की गुणवत्ता घटिया स्तर की थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नमूनों की जांच के लिए वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल किया गया था और नमूना उठाने वालों भी प्रशिक्षण दिया गया था। यही नहीं जिस जगह से नमूने उठाने हैं और जिन्हें नमूना उठाना है उन्हें भी छापेमारी से कुछ देर पहले ही इस बात की जानकारी मिल पाती थी। जिसकी वजह से इस सर्वे की पारदर्शिता पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते।