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सरकार को वापस लेना चाहिए MLAs को बचाने वाला बिल: सुब्रमण्यम स्वामी
टीम डिजिटल अमर उजाला
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:45 AM IST
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सुब्रमण्यम स्वामी
राजस्थान में जनसेवकों और विधायकों पर एफआईआर से पहले सरकार की मंजूरी से जुड़े बिल की खिलाफत अब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी की है। उन्होंने ट्विटर पर सीएम वसुंधरा राजे से गुजारिश की है कि वे इस बिल को वापस लें। उन्होंने लिखा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस बिल को खारिज कर देगा तो उन्हें बड़ा झटका लगेगा।
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ऐसा माना जा रहा है कि राजस्थान सरकार भी इस बिल के हो रहे विरोध के चलते एक बार फिर से इस पर विचार कर रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक विधानसभा सत्र के पहले दिन ही सीएम राजे ने राज्य प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी से सीएम आवास पर मुलाकात की।
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I urge Vasundara to take back her ill fated Gag Bill. It is a sterile exercise&receive a rap from SC when the apex court strikes it down.
विज्ञापन विज्ञापन— Subramanian Swamy (@Swamy39) October 23, 2017
सूत्रों की माने तो मंत्रियों के अलावा सीएम राजे ने सीनियर ब्यूरोक्रेट्स से भी मुलाकात की। बताया जा रहा है कि बिल को लेकर कैबिनेट मिनिस्टर राजेंद्र राठौड़, गुलाबचंद कटारिया, अरुण चतुर्वेदी और युनूस खान ने भी सीएम हाउस में मुलाकात की।
पढ़ें: बैकफुट पर वसुंधरा सरकार, जनप्रतिनिधियों-लोकसेवकों के 'रखवाले' बिल पर होगा पुनर्विचार!
दरअसल, जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेने संबंधी बिल राजस्थान विधानसभा में पेश हुआ। इसको लेकर देशभर में राज्य सरकार की किरकिरी हो रही है।
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इस तरह दबाव में आई सरकार
राजस्थान में दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश-2017 का मसौदा तैयार होने के साथ ही विरोध शुरू हो गया। इस बिल को मीडिया की आजादी छीनने वाला और भ्रष्ट अफसरों एवं जनप्रतिनिधियों को संरक्षण देने वाला बताते हुए विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथ लिया।
सोमवार को विधानसभा की कार्रवाई के दौरान इस बिल के विरोध में कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया और इस हंगामे के बीच ये बिल पेश हुआ। इसके बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस ने बिल के विरोध में सदन के बाहर गिरफ्तारियां दी और प्रदर्शन भी किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले में वसुंधरा सरकार की किरकिरी हो रही है।
यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी मौखिक तौर पर इस बिल को निकम्मों को बचाने वाला बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस बिल को लेकर राज्य सरकार को ट्रोल किया जा रहा है। चौतरफा घिरने के बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार का मन बनाया है।
सोमवार को विधानसभा की कार्रवाई के दौरान इस बिल के विरोध में कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया और इस हंगामे के बीच ये बिल पेश हुआ। इसके बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस ने बिल के विरोध में सदन के बाहर गिरफ्तारियां दी और प्रदर्शन भी किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले में वसुंधरा सरकार की किरकिरी हो रही है।
यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी मौखिक तौर पर इस बिल को निकम्मों को बचाने वाला बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस बिल को लेकर राज्य सरकार को ट्रोल किया जा रहा है। चौतरफा घिरने के बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार का मन बनाया है।