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ICMR: दांतों की सेहत दुरुस्त रखने के लिए 26 करोड़ बच्चों पर होगा अध्ययन, वैज्ञानिकों की टीम बनी
Mon, 03 Jul 2023 06:19 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 03 Jul 2023 06:19 AM IST
सार
आईसीएमआर ने जानकारी दी है कि देश में करीब 26.50 करोड़ स्कूली बच्चे हैं। अधिकांश बच्चे दांतों की बीमारियों को लेकर पीड़ित हैं जबकि इन बीमारियों से उन्हें बचाया जा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश के 26 करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चों में दंत रोगों को लेकर एक अध्ययन करने का फैसला लिया है जिसके लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इस शोध में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को शामिल करने के लिए आईसीएमआर ने देश के अन्य शोध संस्थानों से भी सहायता मांगी है।
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आईसीएमआर ने जानकारी दी है कि देश में करीब 26.50 करोड़ स्कूली बच्चे हैं। अधिकांश बच्चे दांतों की बीमारियों को लेकर पीड़ित हैं जबकि इन बीमारियों से उन्हें बचाया जा सकता है। मौजूदा समय में पारंपरिक तौर पर स्कूलों में बच्चों को दांतों की सफाई रखने का पाठ पढ़ाया जाता है लेकिन वैज्ञानिक नीति के आधार पर इसे कैसे अभिभावक और बच्चों तक पहुंचा सकते हैं?
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इस पर अब तक शोध नहीं हुआ है। इसी तरह, स्कूल-आधारित मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में विशेषतौर पर ब्रश करने की शिक्षा देने में काफी कमी देखी जा रही है। बच्चों में डीएमएफटी (रोगग्रस्त, सड़न और दांतों का गिरना) जैसी स्थिति काफी तेजी से बढ़ रही है।
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हर राज्य में 4 से 6 जिलों का होगा चयन
इसमें स्कूल-आधारित हस्तक्षेप बहुत जरूरी है क्योंकि बच्चा यहां अपना काफी समय व्यतीत करता है। साथ ही वह स्कूल में लर्निंग स्थिति में होता है। यही वजह है कि आईसीएमआर ने देश को पांच हिस्सों में बांट प्रत्येक राज्य में 4 से 6 जिलों का चयन कर अध्ययन शुरू करने का फैसला लिया है। इस अध्ययन में अलग अलग आयु के बच्चे शामिल होंगे। हालांकि 6 से 10 वर्ष की आयु वाले बच्चों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। आईसीएमआर की डॉ. नीतिका मोंगा के अनुसार, कम उम्र के बच्चों को आसानी से समझाया नहीं जा सकता है लेकिन छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चे काफी जल्दी चीजें समझते हैं।
60% से ज्यादा में दांतों की बीमारियां
2004 में स्कूली बच्चों को लेकर नेशनल ओरल हेल्थ सर्वे हुआ जिसकी रिपोर्ट में पता चला कि देश के अलग अलग हिस्सों में पांच, 12, और 15 वर्ष की आयु के बच्चों में दांतों की बीमारियों का प्रसार क्रमश: 51.9%, 53.8% और 63.1% है। बीते 19 वर्ष में यह स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हुई है। आईसीएमआर ने कहा, यह आंकड़े दर्शाते हैं कि स्कूली बच्चों में दंत रोग का उच्च बोझ एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है।
स्कूली बच्चों में दांतों की सड़न ज्यादा
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2019 रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम और निम्न आय वाले देशों के स्कूली बच्चों में दांतों की सड़न के मामले काफी अधिक हैं। ऐसे दुनिया के लगभग 50 फीसदी मामले इन देशों में हैं। इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल ओरल हेल्थ स्टेटस रिपोर्ट 2022 में पता चला है कि स्कूली बच्चों में दांतों की सड़न का प्रसार 43% तक है और वैश्विक दर 29% है।