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Health: प्रसव के समय एपिड्यूल के इस्तेमाल से मां की जान का जोखिम 35% कम, लाखों गर्भवती महिलाओं पर हुआ अध्ययन
Fri, 24 May 2024 05:39 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 24 May 2024 05:39 AM IST
सार
Health: एपिड्यूरल दवा देने की एक विधि है, जिसमें दवा को रीढ़ की हड्डी के आसपास के एपिड्यूरल स्थान में दिया जाता है। यह तब किया जाता है जब गर्भवती महिला में दिल का दौरा, सेप्सिस और हिस्टेरेक्टॉमी की स्थिति बनती है।
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गर्भावस्था
- फोटो : istock
विस्तार
प्रसव के समय अगर एपिड्यूरल का इस्तेमाल किया जाता है तो मां की जान का जोखिम 35 फीसदी तक कम किया जा सकता है। यह जानकारी स्कॉटलैंड के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में सामने आई है, जिसे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया है। अध्ययन के अनुसार, प्रसव के दौरान एपिड्यूरल देने से शिशु जन्म के बाद मां को होने वाली जटिलताओं का जोखिम कम कर सकते हैं।
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एपिड्यूरल दवा देने की एक विधि है, जिसमें दवा को रीढ़ की हड्डी के आसपास के एपिड्यूरल स्थान में दिया जाता है। यह तब किया जाता है जब गर्भवती महिला में दिल का दौरा, सेप्सिस और हिस्टेरेक्टॉमी की स्थिति बनती है। हिस्टेरेक्टॉमी में गर्भाशय को शल्य चिकित्सा द्वारा हटा दिया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापा ग्रस्त, एक से अधिक बच्चे को जन्म देने या समय से पहले प्रसव के कारण होने वाली स्वास्थ्य परेशानियों में भी एपिड्यूरल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इस अध्ययन में 2007 से 2019 के बीच स्कॉटलैंड में करीब 5.50 लाख महिलाओं की केस हिस्ट्री पर विश्लेषण किया है। 5.50 में से 1.25 लाख माताओं में प्रसव के दौरान एपिड्यूरल पाया और इनमें गंभीर जटिलताओं में कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन में मुख्य रूप से स्कॉटलैंड में प्रसव कराने वाली श्वेत महिलाएं शामिल थीं। ऐसे में यह अध्ययन अन्य देश अपने क्षेत्रीय स्थिति के आधार पर भी शोध कर सकते हैं जिससे बेहतर परिणाम सामने आने की उम्मीद की जा सकती है। इससे मातृ स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
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