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अध्ययन: तेज चलिए, 46% तक नियंत्रित होंगी अनियमित दिल की धड़कनें; 13 साल तक 420000 से अधिक लोगों पर हुआ शोध

Fri, 18 Apr 2025 05:41 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 18 Apr 2025 05:41 AM IST
सार

अध्ययन में ब्रिटेन के यूके बायोबैंक के 4,20,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने स्वयं अपनी चलने की गति धीमी, औसत या तेज  बताई। तेज गति से चलने वालों में हृदय गति असामान्यता (जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन) का खतरा 46% तक कम पाया गया। इसी प्रकार औसत गति से चलने वालों में यह जोखिम 35% तक घटा था।

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Study reveals brisk walking helps in normalizing irregular heartbeats by 46 percent
पैदल चलना (सांकेतिक) - फोटो : istock

विस्तार

तेज पैदल चलने से दिल की अनियमित धड़कनों को सामान्य होने में मदद मिलती है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एट्रियल फिब्रिलेशन या हृदय अतालता कहा जाता है। इसमें हृदय की गति या तो असामान्य रूप से तेज हो जाती है, या अत्यधिक धीमी लेकिन ताजा शोध से यह बात सामने आई है कि तेज गति से पैदल चलना न केवल इस समस्या को नियंत्रित कर सकता है बल्कि इसके जोखिम को 46 फीसदी तक घटाने में भी मददगार साबित हो सकता है।

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ग्लासगो विवि के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन जर्नल ‘हार्ट’ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में ब्रिटेन के यूके बायोबैंक के 4,20,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने स्वयं अपनी चलने की गति धीमी, औसत या तेज  बताई। तेज गति से चलने वालों में हृदय गति असामान्यता (जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन) का खतरा 46% तक कम पाया गया। इसी प्रकार औसत गति से चलने वालों में यह जोखिम 35% तक घटा था। वहीं, धीमी गति से चलने वालों में यह जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहा। 13 वर्षों के इस अध्ययन के दौरान कुल 36,574 लोगों में हृदय गति की विभिन्न समस्याएं विकसित हुईं, जिनमें वेंट्रिकुलर अतालता, अत्यधिक धीमी धड़कन और अन्य हृदय संबंधी विद्युत प्रणाली की गड़बड़ियां शामिल थीं।
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इस तरह मदद करता है तेज चलना

तेज चलने से शरीर में चयापचय दर बेहतर होती है और सूजन संबंधी कारक घटते हैं, जो हृदय की विद्युत गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अतिरिक्त यह मोटापे को कम करता है, जो हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण है। शरीर में इंफ्लेमेशन (सूजन) को घटाकर हृदय की कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखता है। इससे  रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन वितरण बेहतर होता है, जिससे हृदय पर तनाव कम पड़ता है।


निष्क्रिय लोगों में मृत्यु का जोखिम सक्रिय लोगों के मुकाबले 20 से 30% ज्यादा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जो लोग निष्क्रिय रहते हैं उनमें सक्रिय व्यक्तियों की तुलना में मृत्यु का जोखिम 20-30% अधिक होता है। इसलिए पैदल चलना एक सुलभ, सस्ता और प्रभावी व्यायाम माना जाता है। प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर मैकीज बानाच के अनुसार भले ही 10,000 कदम चलना आदर्श माना जाता हो, लेकिन रोजाना सिर्फ 4,000 कदम भी स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। 

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जितने ज्यादा कदम, उतने बड़े लाभ
एक अन्य शोध में पाया कि 1,000  कदम चलने से मृत्यु का जोखिम 15% तक घटता है। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 6,000 से 10,000 कदम प्रतिदिन चलने पर मृत्यु जोखिम में 42% की गिरावट देखी गई।

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