Supreme Court: JPSC परीक्षा में गड़बड़ी पर अदालत सख्त, CBI जांच वाली याचिका पर केंद्र-झारखंड सरकार को नोटिस
जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में मामले की CBI जांच की मांग की गई है। अब सरकारों को इस पर अपना पक्ष रखना होगा।
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झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत के इस कदम से अब केंद्र और झारखंड सरकार को मामले में अपना पक्ष रखना होगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने के साथ परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सामने आए विवाद के बीच दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठे। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित उम्मीदवार ने प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
CBI जांच के अलावा क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने झारखंड के बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, आईटी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी की गई है।
परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में जेपीएससी, सरकारी अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसियों, ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं और परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों को सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है। इनमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, प्रेषण रजिस्टर, परीक्षा केंद्र रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन और परिणाम संबंधी डेटा शामिल हैं।
अदालत की निगरानी में नई परीक्षा कराने की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा उपायों के साथ नई प्रारंभिक परीक्षा कराने का निर्देश देने की भी मांग की है। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के जरिए भर्ती किए गए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द की गई थीं। इससे पहले 18 अगस्त को झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध के बीच 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। नियुक्त अधिकारियों की ओर से इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था।