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अध्ययन: भारत में बढ़ रही कुंवारों की संख्या, बेरोजगारी बड़ी वजह; जानें किन-किन चीजों को तरजीह दे रहा वधू पक्ष
सार
रिपोर्ट यह बताती है कि बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवा लगातार उच्च शिक्षा और डिग्रियां हासिल करने में जुटे हैं, ताकि वे किसी तरह स्थायी नौकरी पा सकें। इस प्रयास में वे विवाह को तब तक टालते रहते हैं, जब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाएं। इससे विवाह की औसत आयु लगातार बढ़ रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत में युवाओं के विवाह में देरी या अविवाहित रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। पहले माना जाता था कि यह समस्या केवल घटते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या का परिणाम है, लेकिन एक नया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन इस संकट के पीछे के अधिक जटिल और गहरे कारणों को उजागर करता है। शोध के अनुसार, नौकरी की कमी और आर्थिक अस्थिरता आज युवाओं के विवाह में सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
पॉपुलेशन स्टडीज में प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि विवाह का दायरा अब पूरी तरह बदल चुका है। वधू पक्ष अब ऐसे वर की तलाश में है जिसके पास स्थायी नौकरी और वित्तीय सुरक्षा हो। नतीजतन, बड़ी संख्या में युवा पुरुष विवाह के दायरे से बाहर होते जा रहे हैं।
जीवनसाथी के लिए सबसे लंबा इंतजार बेरोजगारों का
शोधकर्ताओं ने भारतीय युवाओं को तीन श्रेणियों में बांटा है। प्रथम वर्ग में वे युवा हैं जो कम शिक्षित हैं और बेरोजगार हैं। दूसरे वर्ग में शिक्षित लेकिन बेरोजगार युवा शामिल हैं, और तीसरे वर्ग में वे युवा हैं जो शिक्षित हैं और जिनके पास स्थायी रोजगार है। स्पष्ट है कि विवाह के दायरे में तीसरे वर्ग की ही मांग सबसे अधिक है, जबकि पहले दो वर्गों के युवाओं को जीवनसाथी की तलाश में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवा लगातार उच्च शिक्षा और डिग्रियां हासिल करने में जुटे हैं, ताकि वे किसी तरह स्थायी नौकरी पा सकें। इस प्रयास में वे विवाह को तब तक टालते रहते हैं, जब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाएं। इससे विवाह की औसत आयु लगातार बढ़ रही है।
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मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां हो रही पैदा
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है। बड़ी संख्या में बेरोजगार, अविवाहित और निराश युवाओं में हताशा और असंतोष का बढ़ना समाज के लिए चिंता का विषय है। यदि इस आर्थिक अनिश्चितता को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में विवाह संकट और गहरा सकता है, जिससे देश के समृद्ध सामाजिक ताना-बाना के प्रभावित होने का खतरा है।
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पॉपुलेशन स्टडीज में प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि विवाह का दायरा अब पूरी तरह बदल चुका है। वधू पक्ष अब ऐसे वर की तलाश में है जिसके पास स्थायी नौकरी और वित्तीय सुरक्षा हो। नतीजतन, बड़ी संख्या में युवा पुरुष विवाह के दायरे से बाहर होते जा रहे हैं।
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जीवनसाथी के लिए सबसे लंबा इंतजार बेरोजगारों का
शोधकर्ताओं ने भारतीय युवाओं को तीन श्रेणियों में बांटा है। प्रथम वर्ग में वे युवा हैं जो कम शिक्षित हैं और बेरोजगार हैं। दूसरे वर्ग में शिक्षित लेकिन बेरोजगार युवा शामिल हैं, और तीसरे वर्ग में वे युवा हैं जो शिक्षित हैं और जिनके पास स्थायी रोजगार है। स्पष्ट है कि विवाह के दायरे में तीसरे वर्ग की ही मांग सबसे अधिक है, जबकि पहले दो वर्गों के युवाओं को जीवनसाथी की तलाश में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवा लगातार उच्च शिक्षा और डिग्रियां हासिल करने में जुटे हैं, ताकि वे किसी तरह स्थायी नौकरी पा सकें। इस प्रयास में वे विवाह को तब तक टालते रहते हैं, जब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाएं। इससे विवाह की औसत आयु लगातार बढ़ रही है।
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मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां हो रही पैदा
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है। बड़ी संख्या में बेरोजगार, अविवाहित और निराश युवाओं में हताशा और असंतोष का बढ़ना समाज के लिए चिंता का विषय है। यदि इस आर्थिक अनिश्चितता को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में विवाह संकट और गहरा सकता है, जिससे देश के समृद्ध सामाजिक ताना-बाना के प्रभावित होने का खतरा है।