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शोध में खुलासा, अगले साल से भारत में बढ़ जाएंगी गर्म हवाएं

Sat, 18 May 2019 11:29 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 18 May 2019 11:29 AM IST
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Study: frequency of heat waves and their duration in India may begin to increase from 2020
फाइल फोटो - फोटो : PTI

गर्म हवाओं की फ्रीक्वेंसी और उसकी समयसीमा अगले साल की शुरुआत से बढ़ने वाली हैं। यह कहना है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपिकल मिटियोरोलॉजी (आईआईटीएम) के एक शोध का। शोध में कहा गया है कि 'अल निनो मोडोकी' एक मौसम प्रणाली जो अल नीनो से भिन्न है, वह भारत में गर्म हवाओं के बढ़ने का कारण हो सकती है।

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मिट्टी में मौजूद नमी के घटने और गर्मी का धरती से वातावरण में स्थानांतरित होना इसे और बढ़ा सकता है। यह घटनाएं 2020 और 2064 के बीच घट सकती हैं। यह बड़े पैमाने पर दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी जो अभी तक इससे बचे हुए है। फ्यूचर प्रोजेक्शंस ऑफ हीट वेव्स ओवर इंडिया फ्रॉम सीएमआईपी5 मॉडल्स नाम का यह शोध अतंरराष्ट्रीय जर्नल क्लाइमेट डायनेमिक्स में प्रकाशित हुआ है। 
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इसमें मौसम के नौ मॉडल्स का परीक्षण किया गया ताकि भारत में गर्म हवाओं की तीव्रता, फ्रीक्वेंसी और अवधि और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को समझा जा सके। शोध में जिन मॉडल्स का प्रयोग किया गया उन्होंने 1961 और 2005 के बीच भारत में 54 गर्म हवाओ की पहचान की। 
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पत्र में कहा गया है, 'अध्ययनों से पता चलता है कि भारत के ऊपर गर्म हवाओं की फ्रीक्वेंसी, अवधि और आकाशीय सीमा अल नीनो के सफल वर्षों में ज्यादा पाए गए जब प्रशांत महासागर गर्म रहा। अल नीनो मोडोकी घटनाक्रम मे जब केंद्रीय प्रशांत महासागर गर्म होता है, वह भारत में गर्म हवाओं के लंबे समय तक रहने का कारण बनता है।'


2020 से 2064 के बीच 138 गर्म हवाओं की घटनाएं घटित हो सकती हैं। आईआईटीएम के वैज्ञानिक पी मुखोपाध्याय ने कहा कि अतीत में हुए शोध दिखाते हैं कि इसे अल नीनो और प्रशांत महासागर की सतही विसंगतियों से जोड़ा जाता रहा है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि 1961 और उसके बीच गर्म हवा उत्तरपश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्व भारत में प्रति सीजन लगभग 5-7 दिनों की औसत अवधि के दौरान हुआ।

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