{"_id":"5b6b07c14f1c1b8d3e8b5ce0","slug":"students-who-can-t-write-roll-number-properly-don-t-have-right-to-pass-exam-says-supreme-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"जो छात्र अपना रोल नंबर ठीक से नहीं लिख सकता, उसे पास होने का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जो छात्र अपना रोल नंबर ठीक से नहीं लिख सकता, उसे पास होने का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Aug 2018 08:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो छात्र परीक्षा में अपना रोल नंबर तक ठीक से नहीं लिख सकता, उसे पास होने का कोई हक नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि ऐसे छात्रों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि जो छात्र परीक्षा में रोल नंबर तक सही से नहीं लिख सकते वैसे छात्र यह नहीं कह सकते कि परीक्षा उनकेलिए जीवन-मरण का सवाल है।
विज्ञापन
पीठ ने कहा 'परीक्षा में एक बार फेल होने का यह मतलब नहीं है कि छात्र खुदकुशी कर सकता है और वह यह दावा करें कि यह उसकेजीवन-मरण का सवाल है।’
शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी करते हुए कुलदीप कुमार तिवारी सहित अन्य द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। गत 25 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था।
विज्ञापन
पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विभा मखीजा से कहा, 'आप यह नहीं कह सकते कि आप परीक्षा के लेकर डरे हुए थे और परीक्षा की चिंता के कारण उनसे यह गलती हो गई। अगर ऐसा है तो वैसे छात्र को परीक्षा में बैठना ही नहीं चाहिए।’ पीठ ने कहा, %अगर छात्र अपना रोल नंबर तक ठीक से नहीं भर सकता तो वह परीक्षा में पास होने का हकदार नहीं है।’
मामले के मुताबिक, याचिकाकर्ता छात्र यूपी टीचर्स इलिजिबिलिटी टेस्ट(टेट)-2017 में शामिल हुए थे। इन छात्रों ने यह कबूल किया था कि उन्हें उत्तर पुस्तिका में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रोल नंबर गलत भरा था। इन छात्रों ने गुहार लगाई थी कि परीक्षा अथॉरिटी को यह निर्देश दिया जाए कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की कंप्यूटर से नहीं बल्कि हाथ से जांच की जाए और परिणाम घोषित किया जाए।
हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए था कि इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र परिपक्व थे और इस परीक्षा के जरिए वे स्कूलों में सहायक शिक्षक बन सकते थे। ऐसे में इन छात्रों से यह उम्मीद की जाती है कि वे निर्देशों को सावधानीपूवर्क पढ़ेंगे और पंजीकरण व रोल नंबर सही भरेंगे।