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Education: इस वजह से हायर एजुकेशन के लिए UK-USA नहीं जाना चाहते हैं छात्र?, अब इन देशों की बढ़ रही है डिमांड
Thu, 17 Apr 2025 05:05 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 17 Apr 2025 05:05 PM IST
सार
केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध आंकड़े बताते है कि, जर्मनी, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय के एक जवाब के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ी है।
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विदेश शिक्षा
- फोटो : freepik
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विस्तार
अब अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देश भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण देश नहीं रहे है। पढ़ाई और करियर के लिए छात्रों का रूझान जर्मनी, आयरलैंड, न्यूजीलैंड और रूस की तरफ तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध आंकड़े बताते है कि, जर्मनी, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय के एक जवाब के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ी है। वर्ष 2022 में यहां 20,684 छात्र थे और यह संख्या 2024 में बढ़कर 34,702 पहुंच गई। इसी प्रकार न्यूजीलैंड में भी भारतीय छात्रों की संख्या में भारी उछाल आई है। यहां इनकी संख्या 2022 में 1,605 से बढ़कर 2024 में 354 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,297 हो गई। यही नहीं, रूस में 2022 और 2024 के बीच भारतीय छात्रों में 59 प्रतिशत और आयरलैंड में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विदेश में शिक्षा संबंधी जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां, कनाडा के साथ तनावपूर्ण संबंध, सख्त वीजा नियम, वीजा रद्द होने और नस्लवाद की बढ़ती घटनाएं चले इन बड़े देशों से छात्र मुंह मोड़ रहे है। ‘अमेरिका में ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की गूंज और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन में नीतिगत बदलाव जैसे कारकों के कारण छात्र इन देशों से दूरी बना रहे है। इसलिए हायर एजुकेशन के लिए भारतीय छात्र बड़े देशों को छोड़कर दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इस खोज में कई यूरोपीय देश और न्यूजीलैंड प्रमुख पसंदीदा जगहों के रूप में उभर रहे हैं। क्योंकि न्यूजीलैंड और यूरोपीय देशों की इमिग्रेशन पॉलिसी अन्य देशों की तुलना में बहुत सरल और आकर्षक है। छात्रों को वहां पढ़ाई के लिए कई विकल्प भी मिलते है। इसके साथ ही पढ़ाई के बाद रोजगार के भी कई अवसर है।
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ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के बातते है कि, कनाडा में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में साल-दर-साल 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में यहां 2,33,532 भारतीय छात्र थे। लेकिन 2024 में यह संख्या घटकर 1,37,608 पर आ गई। इसी तरह, ब्रिटेन में सालाना स्तर पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई है, जहां 2023 में 1,36,921 छात्र पढ़ रहे थे, वहीं 2024 में घटकर 98,890 ही रह गए। इसी प्रकार अमेरिका में भारतीय छात्रों में 13 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है ।
इसलिए अमेरिका अभी भी है आगे
विदेश में शिक्षा संबंधी जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि नीतिगत या व्यक्तिगत अनेक कारकों के कारण घटी संख्या के बावजूद अमेरिका का आकर्षण छात्रों में कायम है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की ओपन सोर्स रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में छात्रों को भेजने के मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया है। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में भारत के 3,31,602 छात्र अमेरिका में पढ़ रहे थे। वर्ष 2023-24 के दौरान अमेरिका ने 41 प्रतिशत एफ1 वीजा रद्द किए। इस अवधि में यहां 679,000 आवेदन किए गए थे, लेकिन इनमें से 279,000 को खारिज कर दिया गया।
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केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध आंकड़े बताते है कि, जर्मनी, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय के एक जवाब के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ी है। वर्ष 2022 में यहां 20,684 छात्र थे और यह संख्या 2024 में बढ़कर 34,702 पहुंच गई। इसी प्रकार न्यूजीलैंड में भी भारतीय छात्रों की संख्या में भारी उछाल आई है। यहां इनकी संख्या 2022 में 1,605 से बढ़कर 2024 में 354 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,297 हो गई। यही नहीं, रूस में 2022 और 2024 के बीच भारतीय छात्रों में 59 प्रतिशत और आयरलैंड में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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विदेश में शिक्षा संबंधी जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां, कनाडा के साथ तनावपूर्ण संबंध, सख्त वीजा नियम, वीजा रद्द होने और नस्लवाद की बढ़ती घटनाएं चले इन बड़े देशों से छात्र मुंह मोड़ रहे है। ‘अमेरिका में ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की गूंज और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन में नीतिगत बदलाव जैसे कारकों के कारण छात्र इन देशों से दूरी बना रहे है। इसलिए हायर एजुकेशन के लिए भारतीय छात्र बड़े देशों को छोड़कर दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इस खोज में कई यूरोपीय देश और न्यूजीलैंड प्रमुख पसंदीदा जगहों के रूप में उभर रहे हैं। क्योंकि न्यूजीलैंड और यूरोपीय देशों की इमिग्रेशन पॉलिसी अन्य देशों की तुलना में बहुत सरल और आकर्षक है। छात्रों को वहां पढ़ाई के लिए कई विकल्प भी मिलते है। इसके साथ ही पढ़ाई के बाद रोजगार के भी कई अवसर है।
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ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के बातते है कि, कनाडा में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में साल-दर-साल 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में यहां 2,33,532 भारतीय छात्र थे। लेकिन 2024 में यह संख्या घटकर 1,37,608 पर आ गई। इसी तरह, ब्रिटेन में सालाना स्तर पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई है, जहां 2023 में 1,36,921 छात्र पढ़ रहे थे, वहीं 2024 में घटकर 98,890 ही रह गए। इसी प्रकार अमेरिका में भारतीय छात्रों में 13 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है ।
इसलिए अमेरिका अभी भी है आगे
विदेश में शिक्षा संबंधी जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि नीतिगत या व्यक्तिगत अनेक कारकों के कारण घटी संख्या के बावजूद अमेरिका का आकर्षण छात्रों में कायम है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की ओपन सोर्स रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में छात्रों को भेजने के मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया है। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में भारत के 3,31,602 छात्र अमेरिका में पढ़ रहे थे। वर्ष 2023-24 के दौरान अमेरिका ने 41 प्रतिशत एफ1 वीजा रद्द किए। इस अवधि में यहां 679,000 आवेदन किए गए थे, लेकिन इनमें से 279,000 को खारिज कर दिया गया।