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विधानसभा चुनाव: क्या असम मॉडल को पश्चिम बंगाल में अपनाने का संकेत दे रही है भाजपा?

Mon, 15 Mar 2021 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 15 Mar 2021 04:05 PM IST
सार

  • शुभेन्दु अधिकारी और बाबुल सुप्रियो के चुनाव लड़ने के बाद तेज हुई भाजपा नेताओं के बीच चर्चा
  • बड़ा सवाल: क्या बाबुल सुप्रियो को मिलेगा भूमिपुत्र का दर्जा?

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Strongly rumors that BJP is planning to implement Assam Model in West Bengal, if they win west bengal assembly election 2021
बाबुल सुप्रियो और सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

क्या पश्चिम बंगाल में भाजपा बाबुल सुप्रियो को भूमिपुत्र (भावी मुख्यमंत्री का चेहरा) बनाएगी और उनके साथ तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए शुभेन्दु अधिकारी बड़ी भूमिका निभाएंगे? क्या पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति आने पर असम की तरह सर्बानंद सोनोवाल और हेमंत बिस्वा शर्मा का मॉडल अपनाया जाएगा? पश्चिम बंगाल भाजपा में इसकी चर्चा जोरों पर है। भाजपा के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तृणमूल के लोग भाजपा का चेहरा मांग रहे थे और अब पार्टी चेहरों को चुनाव में उतार रही है। तृणमूल के नेताओं की घबराहट बढ़ रही है तो हम क्या करें?

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अचानक से सांसद के प्रत्याशी बनने पर यह चर्चा संभव

पश्चिम बंगाल महिला मोर्चा की प्रमुख अग्निमित्रा पॉल ने अमर उजाला से कहा कि बाबुल सुप्रियो को चुनाव में उतारने के बाद यह चर्चा हो सकती है, क्योंकि अचानक से ऐसा हो रहा है कि सांसद भी चुनाव लड़ेंगे। लेकिन इस बारे में हमें कुछ नहीं पता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला तो चुनाव के बाद ही होगा। इसे हमारे प्रधानमंत्री के मार्ग दर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता तय करेंगे। अभी हमारा मुख्य लक्ष्य सोनार बांग्ला बनाना, चुनाव में 200 से अधिक सीटें जीतना, बंगाल के लोगों में विकास और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए विश्वास पैदा करना है। अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि लोगों ने तृणमूल के शासन में प्रताड़ना झेली है और हमें उन्हें सम्मानजनक जीवन के रास्ते पर लाना है। इसी मुद्दे पर हम लोगों से वोट मांगने में व्यस्त हैं।

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तृणमूल को पछाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे- कैलाश विजयवर्गीय

भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में अपनी सरकार चाहती है। उसके हाथ शुभेन्दु अधिकारी के रूप में बड़ा तुरुप का पत्ता लगा है। अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी भी तृणमूल के बड़े नेताओं में हैं। भाई दिव्येन्दु अधिकारी और पिता शिशिर दोनों लोकसभा सांसद हैं। क्षेत्र में इनका दबदबा रहता है। शुभेन्दु के भाजपा में शामिल होने के बाद जितेन्द्र तिवारी जैसे नेताओं ने भी भाजपा में आने में संकोच नहीं किया। अब भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जीत का हर समीकरण खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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बताते हैं कि भाजपा के कुछ फैसलों ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष को भी भीतर से हैरान करना शुरू कर दिया है। वहीं पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष समेत घोष के प्रतिद्वंदी नेताओं की खुशी भी किसी बड़े बदलाव की तरफ बढ़ने का इशारा कर रही है। तृणमूल छोड़कर भाजपा में आए अर्जुन सिंह और उनकी टीम के नेता पार्टी को जी जान से सत्ता में लाने में जुटे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ उनकी निगाह पार्टी के भीतर चल रही हलचल पर भी है।

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बाबुल सुप्रियो के मैदान में उतरने से बढ़ी हलचल

भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री और लोकप्रिय नेता बाबुल सुप्रियो को टालीगंज से चुनाव मैदान में उतारा है। बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से लोकसभा सांसद हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बाबुल सुप्रियो पर काफी भरोसा करते हैं। सुप्रियो पिछले कई सालों से पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं। उन्हें यह जिम्मेदारी भी शीर्ष नतृत्व ने ही दे रखी थी। अब बाबुल के मैदान में उतरने के बाद भाजपा के नेताओं को उनमें भूमिपुत्र (भाजपा के मुख्यमंत्री का चेहरा) नजर आ रहा है। एक भाजपा नेता कहते हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री ने पहले ही कहा है कि बंगाल का पुत्र ही राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री होगा। एक अन्य नेता ने कहा कि विषय संवेदनशील है। वह कुछ नहीं कहना चाहते। इस बारे में केवल इतना कहेंगे कि सर्बानंद सोनोवाल भी असम भेजे जाने से पहले केन्द्र सरकार में मंत्री थे।

क्यों हो रही है बाबुल-शुभेन्दु की सर्बानंद-हेमंत की जोड़ी से तुलना

इस तुलना के कई कारण हैं। पहला तो यह कि तृणमूल को छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले 50 साल के शुभेन्दु अधिकारी अब तक का सबसे बड़ा चेहरा है। बाबुल सुप्रियो भी 50 साल के ही हैं। शुभेंदु अधिकारी हेमंत बिस्वा शर्मा की तरह असम में तरुण गगोई सरकार का मजबूत चेहरा थे। अधिकारी ममता सरकार में मंत्री थे। शुभेन्दु अधिकारी का परिवार राजनीतिक घराना है। हेमंत बिस्वा शर्मा की तरह ही क्षेत्र में राजनीतिक दबदबा रखता है और शुभेंदु पश्चिम बंगाल को हर स्तर से समझते हैं।

असम जाने से पहले सर्बानंद सोनोवाल केंद्र सरकार में युवा और खेल मामलों के मंत्री थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार का सबसे ताकतवर चेहरा हेमंत बिस्वा शर्मा ही रहे हैं। बाबुल सुप्रियो पार्श्वगायक हैं और केन्द्र सरकार में राज्यमंत्री हैं। वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि क्या पता भाजपा यह प्रयोग पश्चिम बंगाल में भी अपनाए। क्योंकि दिलीप घोष के साथ शुभेन्दु अधिकारी भाजपा की हर रणनीतिक बैठक में बराबर बने हुए हैं। शांतनु कहते हैं कि सांसद और केन्द्रीय मंत्री को विधानसभा चुनाव लड़ाने की भी आखिर कुछ तो वजह जरूर होगी।

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