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SC: 'नसबंदी के बाद कुत्तों को छोड़ दें, आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाए', सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Fri, 22 Aug 2025 10:41 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 22 Aug 2025 10:41 AM IST
सार

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है। हमने मामले का दायरा पूरे भारत में बढ़ा दिया है। कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को भोजन के लिए समर्पित स्थान बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने 11 अगस्त के अपने निर्देश में कुछ शर्तों के साथ संशोधन करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद आश्रय स्थलों से छोड़ा जाए।

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Release dogs after sterilisation, only aggressive ones to be kept in shelters: Supreme Court modifies order
सुप्रीम कोर्ट का फैसला - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के डॉग शेल्टर्स से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर रोक लगाने वाले अपने 11 अगस्त के निर्देश में संशोधन कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी जगह पर छोड़ दिया जाए, जहां से उन्हें उठाया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने साफ किया कि कुत्तों को छोड़े जाने वाला आदेश रेबीज से संक्रमित या रेबीज से संक्रमित होने की आशंका वाले या फिर आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों पर लागू नहीं होगा।

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सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी
न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारैया की पीठ ने कहा कि डॉग शेल्टर्स से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर रोक लगाने वाले 11 अगस्त के निर्देश को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा। पीठ ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे विशेष भोजन क्षेत्र बनाएं, जहां लोग आवारा कुत्तों को खाना खिला सकें। पीठ ने कहा कि नगर निकायों की ओर से विशेष नगरपालिका वार्ड में आवारा कुत्तों की आबादी और सघनता को ध्यान में रखते हुए भोजन क्षेत्र बनाए जाएंगे। पीठ ने साफ किया कि सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी।
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कुत्तों को गोद लेने के लिए एमसीडी के सामने आवेदन कर सकते हैं पशु प्रेमी
पीठ ने कहा कि निर्धारित भोजन क्षेत्रों के पास नोटिस बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें साफ लिखा होगा कि आवारा कुत्तों को केवल उन्हीं क्षेत्रों में खाना खिलाया जाएगा। पीठ ने कहा कि सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाते पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ संबंधित कानूनी ढांचे के तहत कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि किसी लोक सेवक को अपना कर्तव्य निभाने से रोका जाता है, तो वह इसके लिए उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु प्रेमी कुत्तों को गोद लेने के लिए एमसीडी के सामने आवेदन कर सकते हैं।


'ऐसे सभी मामले शीर्ष न्यायालय को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे'
इस मामले का दायरा पूरे भारत में बढ़ाते हुए पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाया और आवारा कुत्तों के मुद्दे पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित कर लिया। पीठ ने 11 अगस्त के निर्देश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर यह आदेश पारित किया। पीठ ने मामले की सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की।

पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

इससे पहले शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से खासकर बच्चों में रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट पर 28 जुलाई को शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले में अपना आदेश सुनाया था। सर्वोच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने 11 अगस्त को कई निर्देश पारित किए थे, जिनमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के अधिकारियों को सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द पकड़ना शुरू करने और उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था।




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