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जानिए, क्यों सरकार की मजबूरी बन गए गायत्री प्रसाद प्रजापति

Mon, 06 Mar 2017 04:19 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Mon, 06 Mar 2017 04:19 PM IST
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Story of gayatri prajapati, why minister became close to Mulayam and his family

प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति सरकार के लिए गले की हड्डी बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक की याचिका खारिज कर दी है तो राज्यपाल ने भी उनकी बर्खास्तगी के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कड़ा पत्र लिखा है। गायत्री के मुद्दे पर प्रदेश सरकार चारों तरफ से घिरी हुई है, सरकार के लिए ये मुद्दा न उगलते हुए बन रहा है न निगलते हुए।

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खासकर मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए इस समय बड़ी असहज करने वाली स्थिति हो गई है जिन्होंने एक बार न केवल बर्खास्तगी के बाद उन्हें दोबारा मंत्री बनाया बल्कि अमेठी से दोबारा टिकट भी दिया। ऐसे में आलोचकों के निशाने पर मुख्यमंत्री ‌अखिलेश यादव ही हैं।
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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तो उन पर यह तक आरोप लगा चुके हैं कि मुख्यमंत्री ने गायत्री को पुलिस से बचाने के लिए अपने सरकारी आवास में छिपा रखा है। खुद पर आरोपों से आहत मुख्यमंत्री को मीडिया के सामने सफाई देनी पड़ी की जिसे दिक्‍कत हो वो कैमरे लेकर मेरे घर चले और देख ले कि गायत्री वहां हैं भी या नहीं।
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तमाम तरफ से उठते सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि दागी गायत्री प्रसाद प्रजापति उसकी जरूरत बने हुए हैं।

अमिता सिंह को शिकस्त देकर चर्चाओं में आए गायत्री

Story of gayatri prajapati, why minister became close to Mulayam and his family

इसको जानने के लिए थोड़ा फ्लैशबैक में जाने की जरूरत है। साल 2002 तक गायत्री प्रसाद प्रजापति और उनके परिवार का नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की लिस्ट में था। मतलब गायत्री प्रसाद प्रजापति बीपीएल कार्ड धारक थे। इसी बीच परिवार की गरीबी दूर करने के लिए उन्होंने प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया।

दिमाग के तेज प्रजापति ने जल्द ही इस काम में ठीक ठाक पैसा कमा लिया। इसी दौरान उन्होंने राजनीति में भी घुसपैठ शुरू कर दी। बात 2010 की है यूपी के विधानसभा चुनावों में दो साल का समय बाकी था तभी गायत्री ने अमेठी जिले के एक बड़े सपा नेता का दामन थाम लिया।

बातों से दूसरों को साधने में माहिर प्रजापति ने एक डेढ़ साल की कसरत में ही अपने लिए अमेठी से टिकट का जुगाड़ भी कर लिया। जिले के एक वरिष्ठ सपा नेता भी बताते हैं कि गायत्री का मुकाबला अमेठी के राजा संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह से था ऐसे में उनके जितने की उम्‍मीद भी किसी को नहीं थी। लेकिन यहीं गायत्री की किस्मत चमकी और उन्होंने अमिता सिंह को मात देकर विधानसभा की चौखट चूम ली।

बताया जाता है गायत्री की यह चमत्कारिक जीत उस समय सपा नेतृत्व की निगाहों में आ गई। सपा मुखिया मुलायम सिंह तभी से उन्हें पसंद करने लगे। इसी बीच गायत्री ने मुलायम दरबार में हाजिरी लगानी
शुरू कर दी। सबसे पहली उनकी नजदीकि मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव से बढ़ी। कहा तो ये भी जाता है कि प्रतीक ने गायत्री के साथ मिलकर व्यापार में अच्छा खास पैसा कमाया। गायत्री और उसके बेटों के रियल स्टेट के धंधे में भी प्रतीक की काफी भागीदारी बताई जाती है।

मुलायम की पत्नी साधना और प्रतीक से बढ़ाई नजदीकियां

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प्रतीक के साथ गायत्री ने मुलायम की पत्नी साधना गुप्ता का संरक्षण भी प्राप्त कर लिया। पत्नी और बेटे से नजदीकियों के चलते जल्‍द ही गायत्री ने मुलायम से नजदीकियां बढ़ाने में भी कामयाबी हासिल कर ली। इसी बीच गायत्री ने मुलायम का जन्मदिन पूरी धूमधाम से मनाया। गायत्री की इस चाटुकारिता ने उन्हें सरकार के साथ ही मुलायम परिवार में भी खास बना दिया।

मुलायम भी उन्हें पिछडों के बड़े नेता के तौर पर स्‍थापित करने की सोचने लगे। मुलायम से नजदीकियों का ही असर था कि विधायक बनने के एक साल के भीतर ही उन्हें प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बना दिया गया। फरवरी 2013 में उन्हें सिंचाई राज्यमंत्री का पद दिया गया।

लेकिन गायत्री की किस्मत पलटी खनन विभाग में स्‍वतंत्र प्रभार मंत्री बनाए जाने के बाद। जहां उन्हें जल्द ही प्रमोट कर इसी विभाग का कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। इसके बाद गायत्री ने अपने चेलों और खनन माफियाओं के दम पर अकूल दौलत इकट्ठा की। जिसे उन्होंने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के नाम किया। 

मुलायम परिवार से गायत्री की नजदीकी का एक बड़ा कारण ये भी माना जाता रहा कि गायत्री जो भी कमाते उसमें सरकार के 'खास' लोगों का हिस्सा जरूर बचाकर रखते। इसके चलते उन्हें सत्ता का वरदहस्त बना रहा और वो बेखौफ लगे रहे। 

तमाम विवादों के बाद भी अखिलेश ने गायत्री को दिया टिकट

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गायत्री के खिलाफ लोकायुक्त से लेकर कोर्ट तक लगातार शिकायतें करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर आरोप लगाती हैं कि खनन के धंधे से ही गायत्री ने एक हजार करोड़ से भी ज्यादा की संपति इकट्ठा कर ली है। हालांकि इन सबसे बदस्तूर पार्टी और सरकार में गायत्री का जलवा बना रहा।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री अखिलेश को गायत्री प्रजापति को अपनी कैबिनेट से बर्खास्त करने के एक हफ्ते बाद ही सरकार में वापस लेना पड़ा और कैबिनेट में परिवहन मंत्री जैसा बड़ा ओहदा भी देना पड़ा। ऐसा नहीं है कि गायत्री सिर्फ मुलायम को ही पसंद हैं बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश भी उन पर काफी विश्वास करते हैं।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सपा के शीर्ष नेतृत्व में झगड़े के दौरान उम्‍मीदवारों की जितनी भी लिस्ट जारी हुई उन सभी में गायत्री का नाम शामिल रहा। यहां तक की मुलायम को दरकिनार कर जब अखिलेश ने अपने उम्‍मीदवारों की सबसे अलग लिस्ट जारी की उसमें भी गायत्री का नाम रहा और अंतिम लिस्ट में भी गायत्री अपनी जगह बचाने में शामिल रहे।

खास बात ये है कि कांग्रेस से बेशक सपा का गठबंधन हो गया हो लेकिन पार्टी ने  संजय सिंह की पत्नी अमिता के सामने गठबंधन के ही उम्‍मीदवार के तौर पर गायत्री को टिकट देकर उन पर अपना विश्वास साबित कर दिया। यहां तक की अखिलेश ने उनके लिए चुनावी रैली भी की वो बात दीगर है कि उसमें खुद अखिलेश शामिल नहीं रहे। लेकिन गायत्री एक बार फिर मुसीबत में हैं और इस बार उन्हें कोई सहारा मिलता नहीं दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं तो राज्यपाल ने उन्हें मंत्रीमंडल से निकालने का फरमान जारी कर दिया है। 

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