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देश में जीवन प्रत्याशा दर बढ़ी, पुरुषों की तुलना में महिलाएं औसतन ज्यादा जी सकती हैं - रिपोर्ट
Mon, 28 Sep 2020 09:10 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 28 Sep 2020 09:10 AM IST
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- फोटो : पेक्सेल्स
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एक भारतीय औसतन कितने साल तक जी सकता है? ये एक ऐसा सवाल है, जिसका उत्तर हर किसी के लिए अलग हो सकता है। ये इस पर निर्भर कर सकता है कि आप किस राज्य में रहते हो, शहरी या ग्रामीण इलाकों में रहते हो या फिर आपका लिंग क्या है?
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छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पुरुष औसतन 63 साल से कम जीते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश में शहरी महिला औसतन 81 साल तक जी सकती हैं। एक ही देश के नागरिक होने के बाद भी इन दोनों के जीवन जीने की समयसीमा में 18 साल का अंतर है। मतगणना और रजिस्ट्रार जनरल के ऑफिस की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के मुताबिक भारत में जन्म से जीवन प्रत्याशा बढ़ गई है।
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1970-75 के बीच ये 49.7 साल थी लेकिन साल 2014-18 के बीच ये बढ़कर 69.4 साल हो गई है। अगर जन्म के एक साल तक बच्चा जीवित रह जाता है तो उसकी जीवन प्रत्याशा दर तीन साल तक बढ़ जाती है। इससे पता चलता है कि कैसे किसी भी देश की जीवन प्रत्याशा दर पर नवजात मृत्युदर का असर पड़ता है।
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ज्यादातर भारतीय 70 साल से ज्यादा जी सकते हैं, अगर वो अपने जीवन के पहले साल को पार कर जाएं। हालांकि छत्तीसगढ़, असम और उत्तर प्रदेश पर ये नियम लागू नहीं होता। यहां बच्चा अपना पहला साल जीने के बाद भी 70 साल तक अपना जीन जीने की संभावना कम रखता है।
देश की शहरी महिलाओं में, केरल और उत्तराखंड राज्य की महिलाओं को छोड़कर जीवन प्रत्याशा दर ज्यादा देखी जाती है। इन दोनों राज्यों में ग्रामीण महिलाएं, शहरी महिलाओं की तुलना में ज्यादा जीवन जीती हैं। जम्मू-कश्मीर मेें शहरी महिलाओं की जीवन प्रत्याथा 86.2 साल है, पंजाब में 85.4 साल और हिमाचल प्रदेश में 85.2 साल है।
हिमाचल में शहरी महिलाएं औसतन 80.6 साल जीवन जीती हैं और जो कि ग्रामीण पुरुषों के जीवन प्रत्याशा से 11.4 साल ज्यादा है, ग्रामीण पुरुष औसतन 69.2 साल जीते हैं। वैश्विक दृष्टि से देखें या अपने देश में महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जीवन प्रत्याशा दर रखती हैं।
हालांकि ये नियम बिहार और झारखंड में लागू नहीं होता है। उत्तर प्रदेश में महिला और पुरुष के जीवन प्रत्याशा के बीच का अंतर काफी कम है, मात्र एक साल है। जबकि असम और पश्चिम बंगाल में ये अंतर दो साल है। सबसे ज्यादा अंतर हिमाचल प्रदेश में है, जहां महिलाएं, पुरुषों से सात साल ज्यादा जीवन जीती हैं। उत्तराखंड में यह अंतर 6.4 साल और केरल में 5.4 साल है।